मंडे मेगा स्टोरी‘बंटवारे में मैंने हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिमों का पक्ष लिया’: भारत में आते-आते छिटका लाहौर; रेडक्लिफ ने कैसे किया भारत का बंटवारा3:58Play video
मंडे मेगा स्टोरी‘बंटवारे में मैंने हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिमों का पक्ष लिया’:भारत में आते-आते छिटका लाहौर; रेडक्लिफ ने कैसे किया भारत का बंटवारा10 घंटे पहलेलेखक: अभिषेक गर्गकॉपी लिंकअगस्त 1947, लाहौर। मशहूर लेखक खुशवंत सिंह और उनके परिवार को यकीन था कि बंटवारे के बाद लाहौर भारत में ही रहेगा। पूर्व पीएम इंद्र कुमार गुजराल के…
‘बंटवारे में मैंने हिंदुओं से ज्यादा मुस्लिमों का पक्ष लिया’:भारत में आते-आते छिटका लाहौर; रेडक्लिफ ने कैसे किया भारत का बंटवारा
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अगस्त 1947, लाहौर। मशहूर लेखक खुशवंत सिंह और उनके परिवार को यकीन था कि बंटवारे के बाद लाहौर भारत में ही रहेगा। पूर्व पीएम इंद्र कुमार गुजराल के भाई के ज्यादातर मुस्लिम दोस्त भी यही मानते थे। वजह- लाहौर की 40% हिंदू-सिख आबादी 80% कारोबार चलाती थी।
आजादी के 48 घंटे बाद, बंटवारे का नक्शा जारी हुआ, तो लाहौर पाकिस्तान के हिस्से में चला गया। हजारों लोग अचानक अपने घर में बेगाने हो गए। रातों-रात सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा। बंटवारे की कहानी ऐसी ज्यादतियों से भरी है। किसी की रसोई भारत और बेडरूम पाकिस्तान में चला गया, तो किसी का खेत दो देशों में बंट गया।
रेडक्लिफ लाइन खिंचने की 79वीं बरसी पर भारत-पाक बंटवारे की पूरी कहानी, मंडे मेगा स्टोरी में…
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ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह
रेफरेंसेस
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