आज का एक्सप्लेनर: क्या H1N1 वायरस, कोविड जैसा खतरनाक; भारत में 13000 से ज्यादा मामले, स्वाइन फ्लू से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब3:53Play video
आज का एक्सप्लेनर: क्या H1N1 वायरस, कोविड जैसा खतरनाक; भारत में 13000 से ज्यादा मामले, स्वाइन फ्लू से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब.
आज का एक्सप्लेनर: क्या H1N1 वायरस, कोविड जैसा खतरनाक; भारत में 13000 से ज्यादा मामले, स्वाइन फ्लू से जुड़े 6 जरूरी सवालों के जवाब.
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Key points
- 22 अगस्त को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने H1N1 के आम लक्षण बताए हैं.
- सवाल-2: H1N1 कैसे और कितना बीमार करता है?
- सवाल-6: H1N1 कोविड की तुलना में कितना खतरनाक इन्फेक्शन है?
- 11 घंटे पहलेलेखक: शिवेंद्र गौरव. कॉपी लिंक.
- सवाल-1: स्वाइन फ्लू वायरस है क्या और इसके लक्षण क्या हैं?
देश में H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस, यानी 'स्वाइन फ्लू' के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। केरल में इन्फ्लुएंजा के 7, 421 मामले आए और 88 मौतें हो चुकी हैं। कर्नाटक में 4000 और दिल्ली में 1, 777 मरीजों में H1N1 की पुष्टि हुई है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और.
आखिर ये वायरस कितना खतरनाक है, क्या कोविड की तरह तेजी से फैलने लगा है; ये कितना जानलेवा, ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में.
जवाब: इन्फ्लुएंजा वायरस को आम बोलचाल में फ्लू कहते हैं। ये वायरस मोटे तौर पर दो तरह के हैं – इन्फ्लूएंजा A और इन्फ्लूएंजा B, जिनमें इन्फ्लुएंजा A ज्यादा खतरनाक होते हैं।.
इन्फ्लुएंजा A वायरस में प्रोटीन के टाइप के मुताबिक, कई सबटाइप होते हैं, जैसे – H1N1, H3N2 और H5N1 आदि।. इनमें सबसे खतरनाक है H1N1 वायरस.
भारत में हर साल जुलाई से सितंबर के बीच इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आते हैं। दूसरे कम खतरनाक इन्फ्लुएंजा टाइप के साथ ही H1N1 भी फैलता है।.
WHO की गाइडलाइंस के मुताबिक, H1N1 मुख्य रूप से उन छोटे छोटे नमी के कणों से फैलता है, जो हम लोग खांसते, छींकते या बात करते समय छोड़ते हैं। संक्रमित व्यक्ति से 1 से 2 मीटर के दायरे में दूसरे लोग भी संक्रमित हो सकते हैं। ये वायरस दरवाजे के हैंडल, मोबाइल फोन जैसी सतहों पर भी 24 घंटे तक जिंदा रह सकता है। इसीलिए कोविड की तरह ही इसमें भी मुंह ढकने और साफ सफाई रखने की सलाह दी जाती है।.
सामान्य सर्दी-जुकाम राइनोवायरस जैसे कुछ वायरस होता है। ये आम तौर पर 3 से 7 दिन में ठीक हो जाता है। वहीं इन्फ्लुएंजा, खास तौर पर H1N1 का संक्रमण कई हफ्ते तक शरीर में रह सकता है।.
जवाब: सामान्य सर्दी-जुकाम के मुकाबले H1N1 में तेजी से और अचानक लक्षण दिखते हैं. सवाल-3: H1N1 कितना जानलेवा वायरस है?
जवाब: 2009-10 में जब स्वाइन फ्लू फैला, तब भारत में भी इसके करीब 20 हजार मामले और 1700 से ज्यादा मौतें हुई थीं। यानी मृत्यु दर करीब 8.5% थी। हालांकि इसके बाद पूरी दुनिया में इन्फ्लुएंजा की वैक्सीन लगाई गईं। बच्चों को भी इसके टीके लगाए जाते हैं।.
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. जितेंद्र पिपले कहते हैं कि अब H1N1 मौसमी फ्लू में शामिल हो गया है। इससे होने वाली मौतों की दर 1% से भी कम है। लोगों में वैक्सीन के चलते इसके खिलाफ एक इम्युनिटी बन चुकी है। एक बार संक्रमण होने पर वैक्सीन लेने के बाद शरीर में कुछ इम्युनिटी बनी रहती है। इसलिए अब ये उतना खतरनाक नहीं है।.
हालांकि पहले से बीमार, बुजुर्ग या कमजोर इम्युनिटी वाले लोग इससे काफी बीमार हो सकते हैं। डॉ. पिपले के मुताबिक, H1N1 फेफड़े या नाक और गले के अलावा शरीर के बाकी अंगों पर भी असर डालता है। ये शरीर में सूजन बढ़ाता है। दिल के धड़कने की रफ्तार, यानी हार्ट-बीट बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से दिल से जुडी समस्याएं हैं, अस्थमा, डायबिटीज या HIV है, उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा हो सकता है। बुजुर्गों और बच्चों में बुखार, डिहाइड्रेशन, ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, इससे भी हार्ट फेलियर हो सकता है।.
दिल्ली में अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौतम नाइक कहते हैं, 'H1N1 के कुछ दुर्लभ मामलों में मायोकार्डिटिस, यानी दिल की मांसपेशियों में सूजन आ सकती है। इसलिए डॉक्टर H1N1 के मरीजों में दिल से जुड़े लक्षणों पर गौर करते हैं। सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पैरों में सूजन और तेज हार्ट-बीट, हो तो इसे सिर्फ फ्लू का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।'.
सवाल-4: इसका इलाज क्या है?
इसके अलावा मौसमी फ्लू की वैक्सीन भी आती हैं। ऐसी ट्राइवैलेंट वैक्सीन भी हैं, जो H1N1, H3N2 और इन्फ्लुएंजा B के इन्फेक्शन को कवर करती हैं। ये वैक्सीन अच्छा काम करती हैं और ज्यादा बीमार होने का जोखिम कम करती हैं। छोटे बच्चों को सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक, सभी टीके लगवाने चाहिए।.
सवाल-5: क्या ठीक होने के बाद भी इसका असर रहता है?
अमेरिका के 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन', यानी CDC के मुताबिक, जो लोग पहले से अस्थमा, डायबिटीज किडनी, लिवर वगैरह की समस्या से पीड़ित हैं, उनमें स्वाइन फ्लू के बाद ये पुरानी बीमारियां भी कुछ समय के लिए बढ़ सकती हैं।.
अजीब आवाजें सुनीं, फिर अपने 3 बच्चों की हत्या कर दी, क्या ये डिलीवरी के बाद हुआ पागलपन या सोची-समझी साजिश.
36 साल की एक मां नोट लिखती है- 'मुझे डर है कहीं मेरे बच्चों को कुछ हो न जाए। मैं कुछ ऐसा न कर दूं जिससे उनका डेवलपमेंट रुक जाए। 5 सालों से मैंने अपना दिमाग पालन-पोषण की बातों से भर रखा है, ये पागलपन है।' पूरी खबर पढ़िए.
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