नेपाल से भास्करहॉस्पिटलों में मिट्टी से सने मरीज, 6 दिन बाद रेस्क्यू: चीन बॉर्डर का रास्ता नदी में समाया, बिना मदद के फंसे 10 हजार लोग2:54Play video
हॉस्पिटलों में मिट्टी से सने मरीज, 6 दिन बाद रेस्क्यू: चीन बॉर्डर का रास्ता नदी में समाया, बिना मदद के फंसे 10 हजार लोग.
हॉस्पिटलों में मिट्टी से सने मरीज, 6 दिन बाद रेस्क्यू: चीन बॉर्डर का रास्ता नदी में समाया, बिना मदद के फंसे 10 हजार लोग.
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Key points
- 300 से ज्यादा व्यापारी-ड्राइवर लापता, करीब 75 कंटेनर बहे.
- टनल के ऊपर 150 मीटर तक जमी गाद, सेना कर रही रेस्क्यू.
- काठमांडू31 मिनट पहलेलेखक: आशीष राय और रमेश पोख्रेल. कॉपी लिंक.
- 'बुलेट ट्रेन की रफ्तार से आया पानी, 10 मिनट में सब खत्म'.
- 'आंखों के सामने 4 मंजिला घर बहा, अब कैसे काटें जिंदगी'.
26 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ ने यहां का पूरा नक्शा बदल दिया है। रसुवा जिले ने सबसे ज्यादा बर्बादी देखी है। काठमांडू से यहां पहुंचने वाला रास्ता कहीं भोटेकोशी नदी के बहाव में समा गया, तो कहीं मलबे में दब गया। जो बचा है, उस पर चलना खतरे से खाली नहीं ह.
काठमांडू से रसुवा की दूरी नक्शे पर जितनी दिखती है, जमीन पर उससे कहीं ज्यादा है। रसुवा से 30 किमी पहले पड़ने वाले धुन्चे गांव तक पहुंचने में ही करीब 16 घंटे लग गए। 46 हजार की आबादी वाले रसुवा में 10 हजार लोग अब भी फंसे हैं। इन्हें हेलिकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया जा रहा। हॉस्पिटल घायलों से भरे हैं। इस रास्ते पर बाढ़ और तबाही की ढेरों कहानियां मिलीं।.
धुन्चे से करीब 11 किमी का सफर तय कर हम चिलिमे टनल तक पहुंचे। कुछ दूरी गाड़ी से तय की, बाकी पैदल। टनल के ऊपर पहाड़ की तरफ करीब 150 मीटर की ऊंचाई तक कीचड़ और गाद जमा थी। बाढ़ के वक्त टनल के अंदर काम कर रहे छह कर्मचारी अब भी लापता हैं। अलर्ट के बाद बाहर से भी लोग जान बचाने के लिए टनल में भागे थे।.
टनल में बाढ़ के पानी के साथ चट्टानें, मलबा, गाद और मोटा कीचड़ भी आया। इसने रास्ता बंद कर दिया। रेस्क्यू टीम अभी टनल में करीब 55 से 100 मीटर अंदर पहुंची है। मशीनें और विशेष उपकरण लगाए गए हैं। नेपाली सेना के जवान और सिम्रिक एयर की माउंटेनियरिंग रेस्क्यू टीम तैनात हैं।.
अभिषेक बताते हैं, 'ज्यादातर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है, लेकिन टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू अभी जारी है। मुख्य सड़क और नदी पर बना पुल बह चुका था, इसलिए आगे के 5 गांवों तक पहुंचना नामुमकिन था। फोन से लोगों की जानकारी मिल रही, जिन्हें हेलिकॉप्टर के जरिए मदद पहुंचाई जा रही। काठमांडू से लाई गई राहत सामग्री पुलिस और सेना को दी जा रही थी, ताकि हेलिकॉप्टर के जरिए प्रभावितों तक पहुंच सके।'.
शोभा ने 20-22 साल में कभी ऐसा मंजर नहीं देखा। वे बताती हैं, 'अचानक डिजास्टर अलर्ट आया। डिनर छोड़कर अस्पताल पहुंचे, तो घायलों का आना शुरू हो गया था। किसी के सिर और गर्दन पर चोट थी, तो किसी की हड्डियां टूटी थीं। कुछ के चेहरे मिट्टी से इतने सने हुए थे कि पहचानना मुश्किल था। सीमित संसाधनों में इलाज शुरू हुआ। टूटी सड़कों और बिजली-इंटरनेट के काम ना करने से घायलों को काठमांडू रेफर करना भी मुश्किल था।'.
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धुन्चे के आगे स्याफ्रुबेसी कस्बे में बाढ़ में फंसे लोगों में अमृत भी थे। उन्हें घटना के छह दिन बाद हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू कर आर्मी कैंप लाया गया। करीब 18 घंटे से वो कैंप के बाहर बैठे घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। वे बाढ़ के समय थोड़ी ऊंचाई पर थे, इसलिए बच गए।.
तबाही वाली साइट पर हमें अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया से आए डेरिक स्पेंसर मिले। वे पिछले पांच दिनों से नेपाली सेना के साथ रेस्क्यू में जुटे हैं। 14 साल से आपदा प्रभावित इलाकों में काम कर रहे डेरिक कहते हैं, 'सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ मलबा हटाना नहीं है, बल्कि सही लोगों और सही संसाधनों को सही जगह पहुंचाना और अलग-अलग टीमों के बीच कम्युनिकेशन बनाए रखना है।'.
यहां मिले प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार (CDO) ने हमें बताया कि बाढ़ का पानी करीब 100 से 150 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया था। नेपाल और चीन को व्यापारिक तौर पर जोड़ने वाली सड़क भी इसमें बह गई। चीन से कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, मशीनरी और रोजमर्रा की चीजें इसी रास्ते नेपाल पहुंचती थीं।.
CDO नरेंद्र परियार के मुताबिक, बाढ़ के कारण गोसाइंकुंड ग्रामीण नगरपालिका के साथ उत्तरगया, आमाछोदिंगमो, कालिका और नौकुंडा ग्रामीण नगरपालिका बाकी इलाकों से कट गई हैं। इन इलाकों में हेलिकॉप्टर के जरिए मदद पहुंचाई जा रही है।.
परियार बताते हैं कि लांगटांग का संपर्क भी कट गया। यहां 116 घर और करीब 450 लोग रहते हैं। हर साल यहां 25 हजार से ज्यादा घरेलू और विदेशी टूरिस्ट पहुंचते हैं। बाढ़ के बाद टूरिस्टों को लांगटांग और गोसाइंकुंड से नुवाकोट के दुप्चेश्वर रास्ते से बाहर निकाला गया।.
रसुवा की इकोनॉमी का एक बड़ा हिस्सा टूरिज्म से जुड़ा है। बाढ़ ऐसे वक्त आई जब टूरिज्म सीजन की तैयारी शुरू हो रही थी। CDO नरेंद्र परियार के मुताबिक, रसुवा हादसे में कैलाश मानसरोवर जा रहे 644 टूरिस्टों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें भारत समेत कई देशों के टूरिस्ट शामिल हैं। नेपाल सरकार के साथ रेड क्रॉस सोसाइटी और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां राहत और बचाव अभियान चला रही हैं।.
बाढ़ के 9 दिन बाद भी रसुवा के 300 से ज्यादा व्यापारी, कंटेनर ड्राइवर और दूसरे कारोबारी कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं। कस्टम कार्यालय के कम से कम 15 कर्मचारी अब तक संपर्क में नहीं हैं। सैकड़ों कंटेनर बह गए या मलबे में दब गए। इसमें अरबों रुपए के नुकसान का अनुमान है। बाढ़ से एक दिन पहले 70-75 माल लदे कंटेनर काठमांडू रवाना होने की तैयारी में थे, जो बह गए। इनमें त्योहारी सीजन के लिए कपड़े और दूसरा सामान रखे थे।.
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For now, नेपाल से भास्करहॉस्पिटलों में मिट्टी से सने मरीज, 6 दिन बाद रेस्क्यू: remains the part of the story worth watching, and further updates are likely as more details are confirmed.



