आज का एक्सप्लेनर: राहुल ने जिसके कंधे पर हाथ रखकर मार्च किया, वो नेहा बोरा कौन हैं; कैसे प्रोटेस्ट का चेहरा बनीं3:32Play video

Tue, Oct 13, 2026Updated 06: 06 AM IST.

CrimeNews Info Wire1 min read
आज का एक्सप्लेनर: राहुल ने जिसके कंधे पर हाथ रखकर मार्च किया, वो नेहा बोरा कौन हैं; कैसे प्रोटेस्ट का चेहरा बनीं3:32Play video

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Key points

  • 12 घंटे पहलेलेखक: अभिषेक गर्ग/श्रेया नाकाड़े. कॉपी लिंक.
  • 1. दीपके अपना प्लान बता देते हैं, जबकि नेहा सरप्राइज देती हैं.
  • 2. नेहा पुलिस को चकमा देकर बचती हैं, जबकि दीपके ऐसा नहीं करते.
  • 3. नेहा 'एक्शन मोड' में, CJP को अगली तारीख का इंतजार. ये खबर भी पढ़िए.
  • तिहाड़ जेल से छूटने के बाद नेहा बोरा और JNU छात्र संघ के पदाधिकारी।.

11 अक्टूबर, दोपहर करीब एक बजे। AISA प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन का ऐलान किया। सुरक्षाकर्मी दौड़ पड़े। सवा दो बजे तक वहां माहौल गरमा चुका था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया।.

पुलिस को चकमा देती, हिरासत में नारे लगाती, बैरिकेड्स फांदती और राहुल गांधी से कदमताल मिलातीं नेहा बोरा मौजूदा प्रोटेस्ट का जेन-जी चेहरा बन चुकी हैं। आखिर कौन है नेहा बोरा और CJP लीडरशिप से कैसे अलग है उनकी स्ट्रैटेजी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में.

29 साल की नेहा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। पिता सेना में थे, इसलिए बचपन कई शहरों में बीता। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल में हुई। इसी दौरान उन्होंने चारु मजूमदार, पाब्लो नेरूदा और अरुंधति रॉय जैसे वामपंथी विचारकों को पढ़ना शुरू किया।.

इसी दौरान वे छात्र संगठन AISA से भी जुड़ीं। 1990 में बना यह छात्र संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी CPI (ML) से जुड़ा है।.

एंटी-CAA प्रोटेस्ट के दौरान नेहा ने आस-पास के कई छात्रों को सड़कों पर उतरते, भाषण देते देखा। नेहा बताती हैं कि जिन विचारों को मैंने सिर्फ किताबों, फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज में पढ़ा-देखा था, छात्र उन्हें जमीनी आंदोलन और राजनीति में बदल रहे थे।.

2021 में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में दाखिला लिया। वे स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज में PhD कर रही हैं। यहां AISA के साथ राजनीतिक गतिविधियों और प्रोटेस्ट में ज्यादा एक्टिव हुईं।.

दिसंबर 2024 में नेहा AISA की प्रेसिडेंट बन गईं। 26 फरवरी 2026 को JNU कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन करने के बाद नेहा को पुलिस ने हिरासत में लिया था। यहां से तिहाड़ जेल भी भेजा। 1 मार्च को रिहाई हुई थी।.

नेहा बोरा अपने लिए she के बजाए they/them (वे / उन्हें) सर्वनाम का इस्तेमाल करती हैं। लैंगिक समानता और LGBTQ अधिकारों के समर्थक अक्सर ऐसा करते हैं।.

नेहा के पिता रिटायर हो गए हैं। उन्हें नेहा का लेफ्ट से जुड़ा होना पसंद नहीं, इसलिए 10 साल से बेटी से बात नहीं की। नेहा ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'जब मेरे पापा को पहली बार पता चला कि मैं लेफ्ट से जुड़ी हूं, तो उन्होंने कहा कि हमारे लोगों को मारा जाता है, यही लोग मारते हैं। तुम इनके साथ कैसे जा सकती हो।'.

बीते दिनों पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए नेहा ने 23 दिन की भूख हड़ताल की थी। अनशन के 22वें दिन नेहा की मां लीला बोरा उनसे मिलने जंतर-मंतर आईं थी। नेहा कहती है, 'पिछले कुछ महीनों में मेरी मां को सरकार के नरेटिव में खामियां दिखी हैं। मैं उनसे बात करने की कोशिश करती हूं। शायद थोड़े समय में उनकी सोच भी बदल जाए।'.

नेहा JNU कैंपस में तो खूब एक्टिव थीं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय पहचान जून-जुलाई में NEET पेपर लीक को लेकर हुए प्रोटेस्ट के बाद मिली।.

28 जून को सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने CJP के सपोर्ट में भूख हड़ताल शुरू की, तब नेहा और AISA के कुछ और नेता उनके साथ जुड़ गए। हालांकि पूरा फोकस वांगचुक और CJP पर रहा। फिर भी नेहा अपने जुझारू भाषणों और हड़ताल के साथ डटी रहीं। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस वांगचुक को अस्पताल ले गई।.

20 जुलाई को शबाना आजमी, योगेंद्र यादव, मनोज झा और प्रकाश राज ने नेहा की भूख हड़ताल खत्म करवाई। इसका वीडियो वायरल हुआ।.

अगस्त में वे रांची पहुंची, जहां वे JPSC और JSSC-CGL परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में शामिल हुईं। इसी दौरान उन पर एक शख्स ने कथित तौर पर स्याही फेंक दी।.

नेहा ने स्याही से लथपथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'RSS-बीजेपी के गुंडों ने मुझ पर स्याही फेंकी। उनके लिए स्याही शर्मिंदा करने का जरिया है। हम स्याही से भविष्य लिखेंगे!'

14 सितंबर को नेहा जेन-जी महाजुटान के लिए गोरखपुर पहुंची, तो उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को गुंडा और दंगाई कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ ने बुद्ध और कबीर से जुड़े गोरखपुर को दंगों की भूमि में बदल दिया। इस बयान को लेकर नेहा पर यूपी में 3 FIR दर्ज हुई।.

अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर AISA ने 2 अक्टूबर से दिल्ली में प्रदर्शन शुरू किया। 4 अक्टूबर को अशोका रोड पर हो रहे प्रदर्शन के दौरान नेहा अचानक पुलिस बैरिकैडिंग के ऊपर चढ़ गईं और मुट्ठी उठाकर नारे लगाने लगीं।.

इंडिया गठबंधन ने CEC ज्ञानेश कुमार के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इससे पहले CEC मामले में राहुल गांधी CJI सूर्यकांत से बात करना चाहते थे, लेकिन CJI ने मिलने से मना कर दिया।.

नेहा और दीपके या CJP की प्रोटेस्ट स्ट्रैटजी में इसबार मोटे तौर पर 3 बड़े फर्क नजर आ रहे हैं.

नेहा की टी-शर्ट वाली खोपड़ी का नेपाल जेन-Z प्रोटेस्ट से क्या कनेक्शन, आखिर हर प्रोटेस्ट में क्यों दिखता है समुद्री लुटेरों का 'झंडा'.

AISA प्रमुख नेहा बोरा ने यूं ही ये खोपड़ी और 'वन-पीस' लिखी टी-शर्ट नहीं पहनी है। इंडोनेशिया, नेपाल, फिलीपींस और फ्रांस तक के प्रोटेस्ट में इस खास निशान वाले झंडे का इस्तेमाल किया गया है। 17वीं सदी में इस झंडे का इस्तेमाल समुद्री लुटेरे करते थे। सामने वाले जहाज के लिए इसका मतलब होता था- सरेंडर कर दो, वरना हमला होने वाला है। पूरी खबर पढ़िए.

Taken together, the developments around आज का एक्सप्लेनर: राहुल ने जिसके कंधे पर हाथ रखकर मार्च किया, point to a situation that is still moving, and the coming days should bring more clarity.

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