आज का एक्सप्लेनर: क्या चावल महंगा होना तय, 10 साल में पहली बार पैदावार घटी; जानिए कहां दिक्कत हुई, कब सुधरेंगे हालात3:39Play video
Tue, Sep 29, 2026Updated 05: 56 AM IST.
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- 1. जिन 7 राज्यों में 45% चावल होता है, वहां 40% तक कम बारिश.
- सवाल-1: 2026 में चावल की पैदावार कितनी घट सकती है?
- 2. पिछले साल के मुकाबले 3.6% कम धान का रकबा.
- सवाल-2: चावल की पैदावार इतनी क्यों घटने वाली है? जवाब: मोटे तौर पर 4 वजहें हैं.
- सवाल-3: तो फिलहाल इसका क्या असर पड़ रहा है?
आज का एक्सप्लेनर: क्या चावल महंगा होना तय, 10 साल में पहली बार पैदावार घटी; जानिए कहां दिक्कत हुई, कब सुधरेंगे हालात. 11 घंटे पहले. कॉपी लिंक.
भारत में इस बार पिछले साल से 1 करोड़ टन कम चावल पैदा होने का अनुमान है। पैदावार में ये 17 सालों की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले 2009 में चावल का उत्पादन 10.1% घटा था, तब चावल की कीमतें 20% तक बढ़ गई थीं।.
जवाब: 14.4 करोड़ टन चावल की पैदावार का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले 6.5% कम है। 2025 में 15.4 करोड़ टन चावल हुआ था। 10 साल बाद पहली बार चावल की पैदावार में कमी होने वाली है। हालांकि अभी फसल की कटाई जारी है। ऐसे में ये गिरावट के सिर्फ अनुमान हैं।.
देश की 80% पैदावार खरीफ की फसल से आती है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 25 सितंबर 2026 तक खरीफ धान का रकबा 4.31 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से 3.6% कम है। पिछले साल 4.47 करोड़ हेक्टेयर जमीन पर धान की बुवाई हुई थी।.
ये कर्नाटक के KRS डैम की तस्वीर है, जिसमें पानी की कमी नजर आ रही है।.
सवाल-4: क्या देश में चावल की कमी पड़ जाएगी?
जवाब: पैदावार कम होने का मतलब ये नहीं कहा जा सकता कि देश के अंदर चावल की भारी कमी हो जाएगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि सरकारी भंडार में करीब 6 करोड़ टन चावल का स्टॉक मौजूद है.
सवाल-5: स्टॉक में 6 गुना ज्यादा धान होने के बावजूद चिंता क्यों है? जवाब: इसकी 3 बड़ी वजहें हैं.
1. पूरा स्टॉक खाने लायक चावल का नहीं है.
2. एथेनॉल बनाने में भी चावल का इस्तेमाल.
3. स्टॉक का एक हिस्सा योजनाओं के लिए रिजर्व्ड. सवाल-6: हालात कब तक सुधरेंगे?
कम पैदावार से चावल पर निर्भर दूसरे उद्योगों पर भी असर पड़ेगा। मिसाल के लिए- जानवरों के चारे और चावल के इस्तेमाल से पशु आहार बनाने का व्यापार। भारत में मुर्गी पालन में करीब 70% तक खर्च मुर्गों की फीडिंग पर आता है। यह चारा प्रमुख रूप से टूटे हुए चावल का बनता है।.
पंजाब के प्रमुख बासमती निर्यातक 'जॉसन ग्रेंस' के CMD रणजीत सिंह जॉसन के मुताबिक, 'अक्टूबर के पहले सप्ताह तक उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की मंडियों में चावल की आवक बढ़ेगी। इससे बासमती चावल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद है। उसके बाद ही ज्यादा साफ तस्वीर सामने आएगी।'.
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Taken together, the developments around आज का एक्सप्लेनर: क्या चावल महंगा होना तय, 10 साल में पहली point to a situation that is still moving, and the coming days should bring more clarity.


