आज का एक्सप्लेनर: क्या नमक की गुफाओं के भीतर गुप्त परमाणु विस्फोट कर रहा चीन, ये कितना खतरनाक; अमेरिका को कैसे पता चल गया3:54Play video
Sat, Sep 26, 2026Updated 05: 55 AM IST.
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Key points
- सवाल-1: अमेरिका ने चीन पर क्या आरोप लगाए हैं?
- जवाब: अमेरिका के आरोपों की कहानी 7 साल पहले शुरू होती है.
- सवाल-2: आखिर गुफाओं में परमाणु टेस्ट की डीकपलिंग टेक्नोलॉजी है क्या?
- सवाल-4: कम ताकत वाले न्यूक्लियर बमों की टेस्टिंग ज्यादा खतरनाक क्यों?
- सवाल-5: तो क्या एक बार फिर से न्यूक्लियर रेस शुरू हो जाएगी?
आज का एक्सप्लेनर: क्या नमक की गुफाओं के भीतर गुप्त परमाणु विस्फोट कर रहा चीन, ये कितना खतरनाक; अमेरिका को कैसे पता चल गया. 11 घंटे पहले. कॉपी लिंक.
अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक, अमेरिका और चीन के अधिकारी पिछले कुछ हफ्तों में 3 गोपनीय बैठकें कर चुके हैं। जिनपिंग की विजिट में भी इस मुद्दे पर बातचीत संभव है।.
1996 से पहले अमेरिका और सोवियत रूस ने भी कई बार ये तरीके आजमाए थे। मसलन, 3 दिसंबर, 1966 को अमेरिका ने मिसिसिपी के टाटम साल्ट डोम में इसी डीकपलिंग तकनीक से 'स्टर्लिंग' नाम का टेस्ट किया था।.
सवाल-3: क्या वाकई चीन चोरी-छिपे ऐसा कोई टेस्ट कर रहा है? जवाब: अमेरिका का दावा 22 जून 2020 को कजाकिस्तान के मॉनिटरिंग स्टेशन पर मिले सिग्नल पर टिका है। ये सिग्नल प्राकृतिक भूकंप के सिग्नल जैसे नहीं थे, बल्कि किसी नियंत्रित धमाके जैसे थे।.
17 फरवरी 2026 को अमेरिकी थिंकटैंक हडसन इंस्टीट्यूट के एक इवेंट में अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर ने बताया, 'मैंने इसका एडिशनल डेटा भी देखा है। यह एक अकेला विस्फोट के जैसा लगता है। यह डेटा माइनिंग ब्लास्ट या भूकंप से मेल नहीं खाता।'.
हालांकि CTBTO ने कहा कि रिकॉर्ड किए गए झटकों से पुख्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि ये न्यूक्लियर टेस्ट थे।.
फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में न्यूक्लियर स्ट्रैटजी एक्सपर्ट जेफ्री लुइस के मुताबिक, पिछले 5 साल की सैटेलाइट तस्वीरों में लोप नूर में पहाड़ों के नीचे नई टनल, नई सड़कें और स्टोरेज फैसिलिटीज दिखती हैं। 2022 और 2023 की तस्वीरों की तुलना से पता चलता है कि टनल खोदने से निकली मिट्टी के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं। यानी टनल बड़ी की जा रही है। इससे लग रहा है कि चीन ने न्यूक्लियर टेस्ट किए हैं।.
ये लोप नूर की सैटेलाइट तस्वीर है। अमेरिकी थिंकटैंक CSIS ने इसके एनालिसिस में बताया कि यहां की 'टनल-5' में लगातार गतिविधि बढ़ी है।.
अमेरिका को अंदेशा है कि चीन टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन बना रहा है। ये हिरोशिमा पर गिराए गए करीब 15 हजार टन TNT की ताकत वाले बम से कहीं छोटे बम होंगे। ताकि एक ही मिसाइल पर ज्यादा बम लगाए जा सकें।.
जवाब: दुनियाभर के परमाणु हथियारों पर निगाह रखने वाले स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा, 'दशकों से न्यूक्लियर हथियारों को नियंत्रित करने की कोशिशें हो रही हैं। फिर भी ऐसे हथियार बढ़ रहे हैं। दुनिया में नई न्यूक्लियर आर्म्स रेस उभर रही है। जबकि देशों के बीच में तनाव और गलतफहमियां तेजी से बढ़ रही हैं।'.
दुनियाभर में करीब 12, 187 न्यूक्लियर हथियार हैं। इनमें से 83% हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं। एक साल में रूस के न्यूक्लियर हथियार 4309 से बढ़कर 4400, चीन के 600 से 620, भारत के 180 से 190 और नॉर्थ कोरिया के 50 से 60 पहुंच गए।.
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