आज का एक्सप्लेनर: 2015 में ऐसा क्या हुआ, कि अब नेपाल विदेशी सेनाओं की मदद नहीं लेना चाहता; क्या अकेले हजारों लापता लोग खोज पाएगा4:01Play video
आज का एक्सप्लेनर: 2015 में ऐसा क्या हुआ, कि अब नेपाल विदेशी सेनाओं की मदद नहीं लेना चाहता; क्या अकेले हजारों लापता लोग खोज पाएगा.
आज का एक्सप्लेनर: 2015 में ऐसा क्या हुआ, कि अब नेपाल विदेशी सेनाओं की मदद नहीं लेना चाहता; क्या अकेले हजारों लापता लोग खोज पाएगा.
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11 घंटे पहलेलेखक: शिवेंद्र गौरव. कॉपी लिंक.
नेपाल त्रासदी में 600 से ज्यादा मौतों की पुष्टि हो चुकी है। 80 घंटे बाद भी 2500 से ज्यादा लोग गायब हैं। इनमें 320 भारतीयों समेत चीन, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कई देशों के नागरिक भी शामिल हैं। ये देश रेस्क्यू मिशन के लिए अपनी सेनाएं भेजना चाहते हैं, लेकिन.
सवाल-1: विदेशी मदद लेने पर नेपाल का मौजूदा रुख क्या है? जवाबः नेपाल ने विदेशी 'सर्च एंड रेस्क्यू' टीमों या सेना वगैरह को आने की मंजूरी नहीं दी है। फिलहाल सिर्फ कुछ देशों के तकनीकी एक्सपर्ट्स जा सकते हैं.
सवाल-2: 2015 में ऐसा क्या हुआ था, जो विदेशी सेनाओं की मदद लेने से हिचक रहा नेपाल? जवाब: 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में 7.8 की तीव्रता का भूकंप आया। इसमें करीब 9, 000 लोगों की मौत हुई, 22, 000 घायल हुए और 35 लाख लोग बेघर हो गए थे।.
नेपाल के तब के पीएम सुशील कोइराला की सरकार ने विदेशों से मदद मांगी। 34 देशों से 76 'सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमें नेपाल पहुंच गईं। इनमें 18 देशों की सैन्य टीमें भी थीं। पूरे रेस्क्यू में 3 तरह की दिक्कतें हुईं.
5 मई, 2015 को भूकंप प्रभावित इलाके में दौरे पर नेपाल के तब के पीएम सुशील कोइराला.
2. संवेदनशील इलाकों में विदेशी सेनाएं घूम रही थीं.
भूकंप के दिन ही भारतीय वायुसेना के 6 Mi-17 हेलीकॉप्टर त्रिभुवन एयरपोर्ट पर उतरे। इसके तुरंत बाद चीनी वायुसेना ने भी अपने हेलीकॉप्टर भेजे। उसके बाद अमेरिकी विमान भी आए। ये रेस्क्यू मिशन कम, संवेदनशील इलाकों में मिलिट्री एक्सरसाइज ज्यादा लग रही थी।.
12 मई 2015 को नेपाल में Mi-17 हेलिकॉप्टर से एक घायल को रेस्क्यू करके अस्पताल ले जाते भारत के जवान।.
4 मई 2015 को नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को नेपाल छोड़ने को कहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह भारत और चीन के बीच टकराव था।.
भारतीय मीडिया की रिपोर्टिंग के रवैये को लेकर नेपाल में खूब विरोध हुआ था। नेपाली पत्रकार कुंडा दीक्षित ने कहा था- 'भारतीय मीडिया भूकंप और उसके पीड़ितों की कवरेज को दिल्ली सरकार के जनसंपर्क अभियान की तरह इस्तेमाल कर रही है। वो सिर्फ NDRF की टीमों का काम दिखा रही है। इसका इरादा भारत सरकार की घरेलू छवि सुधारना है।'.
भूकंप के करीब एक हफ्ते बाद नेपाल में #GoHomeIndianMedia और #DontComebackIndianMedia जैसे हैशटैग नेपाल में टॉप ट्रेंडिंग में थे। नेपाली लोग कह रहे थे- नेपाल एक संप्रभु देश है, भारत का कोई सुदूर राज्य नहीं है।.
सवाल-3: तो क्या नेपाल अकेले सभी लापता लोगों को ढूंढ पाएगा? जवाब: नेपाल टूरिस्ट बोर्ड के मुताबिक, भारत के अलावा चीन के 100, अमेरिका के 65, मलेशिया के 55, यूक्रेन के 53, ऑस्ट्रेलिया के 35, कनाडा के 30, ब्रिटेन के 33 नागरिक अभी लापता हैं। कुल लापता लोगों की संख्या करीब 3000 बताई जा रही है। हालांकि ये फाइनल आंकड़े नहीं हैं।.
नेपाल में सबसे ज्यादा तबाही रसुवा जिले, फिर नवाकोट और धादिंग में हुई है। वहीं चीन की तरफ तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी इलाके में 558 लोग लापता हैं, इनमें ज्यादातर विदेशी नागरिक हैं, जिनमें भारत से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हिंदू श्रद्धालु भी हैं।.
सड़कें खराब होने के चलते नेपाल के पास एयर-रेस्क्यू का ही ऑप्शन है। जबकि नेपाली सेना के पास सिर्फ 15 हेलीकॉप्टर हैं। अगर नेपाल को एयर-सपोर्ट चाहिए, तो उसे दूसरे देशों के हेलीकॉप्टरों और सैन्य स्टाफ को भी एंट्री देनी होगी। नेपाली ऑफिसर्स का कहना है कि निजी हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल के बारे में सोचा जा रहा है।.
भारत ने राहत सामग्री की चौथी खेप के साथ डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट्स की एक 11 लोगों की टीम भी भेजी है। नेपाल ने टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट और लाशों की पहचान के लिए एक्सपर्ट्स की मांग की है। भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज भी मांगे हैं। ये पोर्टेबल ब्रिज होते हैं, जिनसे गाड़ियां वगैरह पार की जाती हैं।.
सवाल-4: क्या विदेशी सेनाएं अपने नागरिकों को निकालने के लिए जबरन नहीं घुस सकते? जवाब: UN चार्टर के आर्टिकल 2(4) के तहत किसी देश की सेनाएं, बिना दूसरे देश की मर्जी के सीमा में दाखिल नहीं हो सकतीं। ये उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा।.
नेपाल में तबाही लाने वाले ग्लेशियर टूटने का VIDEO: 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर गिरा था; अब तक 676 मौतें, 2500 लापता.
In short, आज का एक्सप्लेनर: 2015 में ऐसा क्या हुआ, कि अब नेपाल विदेशी is the central thread here, and readers can expect follow-up reporting as the picture becomes clearer.




