जयपुर एयरपोर्ट पर NCC के विमान से टकराया वाहन: पायलट और ट्रेनी कैडेट सुरक्षित; हवाई पट्टी पर जाते वक्त हुआ हादसा0:50Play video

जयपुर एयरपोर्ट पर NCC के विमान से टकराया वाहन:पायलट और ट्रेनी कैडेट सुरक्षित; हवाई पट्टी पर जाते वक्त हुआ हादसाजयपुर5 मिनट पहलेकॉपी लिंकजयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार को NCC के माइक्रोलाइट विमान (एयरक्राफ्ट) के साथ हादसा हो गया। ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरने जा रहे विमान को टैक्सी (एप्रन से हवाई पट्टी पर जाते हुए)…

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जयपुर एयरपोर्ट पर NCC के विमान से टकराया वाहन:पायलट और ट्रेनी कैडेट सुरक्षित; हवाई पट्टी पर जाते वक्त हुआ हादसा

जयपुर5 मिनट पहले
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जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोमवार को NCC के माइक्रोलाइट विमान (एयरक्राफ्ट) के साथ हादसा हो गया। ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरने जा रहे विमान को टैक्सी (एप्रन से हवाई पट्टी पर जाते हुए) करते समय ग्राउंड हैंडलिंग वाहन ने टक्कर मार दी। इससे विमान क्षतिग्रस्

दरअसल, NCC का माइक्रोलाइट विमान सुबह करीब 9 बजे हैंगर से निकलकर उड़ान भरने के लिए टैक्सी कर रहा था। विमान को विंग कमांडर संचालित कर रहे थे। उनके साथ NCC कैडेट ट्रेनिंग के लिए जा रहा था।

मूव कर रहा था ग्राउंड हैंडलिंग वाहन

सूत्रों के अनुसार, माइक्रोलाइट विमान हैंगर से निकलने के बाद उड़ान भरने की प्रक्रिया के तहत टैक्सी कर रहा था। इसी दौरान ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी इंडोथाई का वाहन भी एयरपोर्ट परिसर में मूव कर रहा था।

हादसे के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। तत्काल विमान और वाहन को सुरक्षित किया गया। वहीं इस हादसे की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई। अब विमान को तकनीकी जांच के बाद ही दोबारा उड़ान के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।

जयपुर एयरपोर्ट पर हुए हादसे के बाद ऑपरेशन पर सवाल उठ रहे हैं।

जांच के बाद सामने आएगा कारण

हादसे के बाद एयरपोर्ट ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (AOCC) और ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एयरपोर्ट के संवेदनशील एप्रन क्षेत्र में विमान और ग्राउंड वाहनों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा मानकों और कॉर्डिनेशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रारंभिक तौर पर हादसे के पीछे ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट में चूक की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विमान और वाहन की मूवमेंट के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।

कम्युनिकेशन और सेफ्टी कोऑर्डिनेशन था या नहीं

एयरपोर्ट अधिकारी हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। इसमें यह देखा जाएगा कि माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट को टैक्सी करने की अनुमति और ग्राउंड वाहन की मूवमेंट किस तरह हुई। साथ ही दोनों के बीच आवश्यक कम्युनिकेशन और सेफ्टी कोऑर्डिनेशन था या नहीं।

NCC कैडेट्स की फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट की सुरक्षा को देखते हुए घटना को गंभीर माना जा रहा है।

हादसे के बाद उठे कई सवाल

हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि एयरपोर्ट के एप्रन में वाहनों की आवाजाही संभालने वाले एप्रन कंट्रोल सेंटर की जिम्मेदारी क्या है? क्या कंट्रोल सेंटर को NCC विमान के टैक्सीइंग रूट और उसके मूवमेंट की जानकारी नहीं थी।

प्रदेश के सबसे व्यस्त जयपुर एयरपोर्ट पर रोज औसतन करीब 95 विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ होती है। सर्दियों में यह संख्या 140 से 150 तक पहुंच जाती है। इतने व्यस्त एयरपोर्ट से NCC के माइक्रोलाइट विमानों की ट्रेनिंग क्यों कराई जा रही है?

सुरक्षा की दृष्टि से NCC ट्रेनिंग को जयपुर के नजदीकी किशनगढ़ एयरपोर्ट जैसे कम व्यस्त एयरपोर्ट पर शिफ्ट करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। ताकि कॉमर्शियल फ्लाइट ऑपरेशन और ट्रेनिंग विमानों की मूवमेंट के बीच किसी तरह का जोखिम न रहे।

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