दिल्ली पुलिस बोली- संसद मार्च की परमिशन नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट में कहा- प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, हमने जंतर-मंतर पर ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया0:59Play video
दिल्ली पुलिस बोली- संसद मार्च की परमिशन नहीं थी:सुप्रीम कोर्ट में कहा- प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, हमने जंतर-मंतर पर ज्यादा बल प्रयोग नहीं कियानई दिल्ली5 मिनट पहलेकॉपी लिंकदिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी परमिशन नहीं थी। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन…
-
कॉपी लिंक
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी परमिशन नहीं थी। पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे।
पुलिस ने कहा कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा। हालात संभालने के लिए बल प्रयोग किया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया।
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर ये जानकारी दी। इसे पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब के तौर पर पेश किया गया है। चार संबंधित याचिकाओं में भी यही जवाब इस्तेमाल होगा।
पुलिस के हलफनामे में जवाब, 5 पॉइंट में समझें
बल प्रयोग की जांच कोर्ट की प्रस्तावित समिति कर सकती है। दिल्ली पुलिस ने समिति के साथ सहयोग करने की बात कही है।
49 दिन चला CJP का प्रदर्शन, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जबकि CJP ने पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई।
—————————-
ये खबर भी पढ़ें…
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर रिजिजू बोले- गोली कहां चली, जेन-जी हमारे बच्चे, उनसे बातचीत जरूरी
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ANI को दिए इंटरव्यू में जेन-जी आंदोलन, जंतर-मंतर प्रदर्शन, अभिजीत दीपके, राहुल गांधी और कांग्रेस पर कई बयान दिए। उन्होंने कहा कि जेन-जी हमारे अपने बच्चे हैं और उनसे लगातार बातचीत जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें…
This website follows the DNPA Code of Ethics.




