नाव पलटी तो सुरैया को बचाने देव आनंद कूदे थे: शादी नहीं हुई तो पहली बार रोए, ‘गाइड’ को लेकर लोगों ने कहा था पागल1:30Play video

Sat, Sep 26, 2026Updated 05: 55 AM IST.

WeatherNews Info Wire1 min read
नाव पलटी तो सुरैया को बचाने देव आनंद कूदे थे: शादी नहीं हुई तो पहली बार रोए, ‘गाइड’ को लेकर लोगों ने कहा था पागल1:30Play video

Sat, Sep 26, 2026Updated 05: 55 AM IST.

Article outline

  1. What happened
  2. The details
  3. A closer look
  4. More on the story
  5. The wider picture
  6. The bottom line

नाव पलटी तो सुरैया को बचाने देव आनंद कूदे थे: शादी नहीं हुई तो पहली बार रोए, 'गाइड' को लेकर लोगों ने कहा था पागल. 44 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय. कॉपी लिंक.

देव आनंद ने अपने 65 साल से लंबे फिल्मी करियर में 114 से अधिक फिल्मों में काम किया।.

साल 1943 की बात है। एक युवा लड़का अपने सपनों को पूरा करने के लिए लाहौर से मुंबई पहुंचा। जेब में सिर्फ 30 रुपए थे और रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था। फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने का सपना था, लेकिन सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि मुंबई जैसे शहर में गुजारा कैसे हो।.

शुरुआत में उसे चॉल में रहना पड़ा। कुछ दिन बीते तो पैसे खत्म होने लगे। फिल्मों में काम मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। आखिरकार पेट पालने के लिए उसे नौकरी करनी पड़ी। मिलिट्री सेंसर ऑफिस में क्लर्क की नौकरी मिली, जहां वह ब्रिटिश सरकार के लिए मिलिट्री सेंसर का काम करते थे। उसे महीने की 65 रुपए तनख्वाह मिलती थी।.

लेकिन जिस लड़के के पास मुंबई पहुंचने के लिए सिर्फ 30 रुपए थे, उसने हार नहीं मानी। कुछ साल बाद वही शख्स हिंदी सिनेमा का ऐसा सितारा बना, जिसे लोग 'एवरग्रीन स्टार' कहने लगे।.

हम बात कर रहे हैं देव आनंद की और उनकी 103वीं बर्थ एनिवर्सरी पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें.

देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को ब्रिटिश भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले में धर्मदेव पिशोरीमल आनंद के रूप में हुआ था। उनके पिता पिशोरी लाल आनंद गुरदासपुर में वकील थे और स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े थे।.

इसके बाद देव आनंद ने तय किया कि अगर जिंदगी में संघर्ष करना ही है, तो क्यों न अपने बचपन के सपने एक्टिंग के लिए संघर्ष किया जाए। इसी सपने को पूरा करने के लिए जून 1943 में वह लाहौर से ट्रेन पकड़कर मुंबई के लिए निकल पड़े।.

शुरुआत में काम नहीं मिला और पैसे खत्म हो गए तो उन्होंने चर्चगेट स्थित मिलिट्री सेंसर ऑफिस में 65 रुपए मासिक वेतन पर नौकरी की। बाद में एक अकाउंटिंग फर्म में 85 रुपए की तनख्वाह पर क्लर्क का काम भी किया। अभिनेता बनने की इच्छा उन्हें अशोक कुमार की फिल्मों से मिली।.

मिलिट्री सेंसर ऑफिस में करीब एक साल तक नौकरी करने के बाद देव आनंद अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास चले गए। चेतन उस समय भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा से जुड़े थे। उन्होंने छोटे भाई को भी अपने साथ जोड़ लिया। यहां से देव आनंद को थिएटर में काम करने और अभिनय सीखने का मौका मिला। फिर किस्मत ने साथ दिया। साल 1946 में उन्हें प्रभात टॉकीज की फिल्म 'हम एक हैं' में काम करने का मौका मिला।.

देव आनंद और गुरु दत्त ने 'बाजी' (1951), 'जाल' (1952) और 'सीआईडी' (1956) जैसी फिल्मों में साथ काम किया है।.

दोनों ने बाद में साथ काम भी किया। देव आनंद ने गुरु दत्त को फिल्म 'बाजी' के निर्देशन का मौका दिया। 1951 में रिलीज हुई यह फिल्म गुरु दत्त के निर्देशन करियर की महत्वपूर्ण शुरुआत बनी और देव आनंद के साथ उनकी दोस्ती भी सिनेमा के पर्दे पर नजर आई।.

इसके बाद उन्होंने सिर्फ अभिनेता बनकर रुकने के बजाय खुद फिल्में बनाने का फैसला किया। 1949 में बड़े भाई चेतन आनंद के साथ नवकेतन फिल्म्स की शुरुआत की। इसी बैनर के तहत बनी 'बाजी' 1951 में रिलीज हुई। यह फिल्म सफल रही और देव आनंद की स्टार इमेज और मजबूत हो गई।.

1950 के दशक में देव आनंद की कई फिल्में सफल रहीं। 'जाल', 'टैक्सी ड्राइवर', 'सीआईडी', 'पेइंग गेस्ट' और 'काला पानी' जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़े सितारों की कतार में खड़ा कर दिया।.

1958 में फिल्म 'काला पानी' के लिए देव आनंद को फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला।.

1960 का दशक देव आनंद के रोमांटिक हीरो वाले दौर के लिए खास रहा। 'हम दोनों', 'तेरे घर के सामने', 'ज्वेल थीफ' और 'गाइड' जैसी फिल्मों ने उनके स्टारडम को और मजबूत किया।.

1965 में रिलीज हुई 'गाइड' उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हुई। फिल्म में उनके साथ वहीदा रहमान थीं। यह फिल्म आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी और इसके फिल्म रूपांतरण में देव आनंद की महत्वपूर्ण भूमिका थी।.

देव आनंद ने सुरैया को 3, 000 रुपए की हीरे की अंगूठी भेजी थी। इस अंगूठी को लेकर बाद में कई किस्से सामने आए। कहा गया कि सुरैया ने इसे समुद्र में फेंक दिया था। हालांकि, देव आनंद ने खुद कहा था कि उन्हें नहीं पता कि अंगूठी के साथ वास्तव में क्या हुआ था।.

Taken together, the developments around नाव पलटी तो सुरैया को बचाने देव आनंद कूदे थे: शादी नहीं point to a situation that is still moving, and the coming days should bring more clarity.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *