भास्कर इन्वेस्टिगेशनजमीन में नहीं, केमिकल से पैदा हो रहा नया आलू: 4 गुना कमाई, VIDEO में देखिए कैसे बनता है 'जहरीला' आलू3:14Play video
जमीन में नहीं, केमिकल से पैदा हो रहा नया आलू: 4 गुना कमाई, VIDEO में देखिए कैसे बनता है 'जहरीला' आलू. लखनऊ3 घंटे पहले. कॉपी लिंक.
जमीन में नहीं, केमिकल से पैदा हो रहा नया आलू: 4 गुना कमाई, VIDEO में देखिए कैसे बनता है 'जहरीला' आलू. लखनऊ3 घंटे पहले. कॉपी लिंक.
Article outline
- What happened
- The details
- A closer look
- More on the story
- The bottom line
यूपी में खाद्य विभाग ने एक साल में 75 टन नया आलू जब्त किया, जिसे केमिकल से तैयार किया था। यानी आलू तो पुराना था, लेकिन उसे इस तरह प्रोसेस किया गया कि वह बिल्कुल नए की तरह दिखने लगे।.
सीजन की शुरुआत में बाजार में नए आलू के दाम औसतन चार गुना तक बढ़ जाते हैं। अगर पुराना आलू 20 रुपए किलो है तो नया 80 रुपए किलो तक बिकता है। इसी मुनाफे के लिए पश्चिमी यूपी में बड़ा गिरोह खड़ा हो गया। यह आलू सेहत के लिए खतरनाक है।.
4 स्टेप में जानिए, पुराने आलू को नया कैसे बनाया जाता है.
स्टेप 1. कोल्ड स्टोरेज में रखा 8-10 महीने पुराना आलू बाहर निकालकर एक-दो दिन सुखाते हैं। इससे आलू की नमी कम हो जाती है।.
स्टेप 2. आलू पर मिट्टी लगाते हैं, ताकि ऐसा लगे कि ये कुछ दिन पहले ही खेत से निकलकर आया है। इस मिट्टी में सेलखड़ी पाउडर, कत्था मिला होता है, जो आलू की परत पर चिपक जाता है।.
स्टेप 3. इसमें मिलाई जाने वाले मिट्टी 3 तरह के रंग की होती है- पीली, काली या लाल। यह इसलिए क्योंकि आलू की खेती पीली, काली या लाल मिट्टी में होती है। जैसे- लखनऊ में लाल मिट्टी का आलू आता है तो यहां ऐसा ही आलू बनाकर भेजते हैं। बुंदेलखंड में काली मिट्टी और दिल्ली में पीली मिट्टी का आलू भेजते हैं।.
स्टेप 4. नए आलू में छिलका थोड़ा निकला हुआ होता है। इसके लिए मिट्टी लगाने के बाद आलू पर अमोनिया (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड-NH3) का छिड़काव करते हैं। इससे मिट्टी लगे आलू में गीलापन आ जाता है और छिलके उतरने लगते हैं। पुराने से नया आलू बनाने की यह प्रोसेस 8 से 10 घंटे में पूरी हो जाती है।.
हमारी टीम सबसे पहले मेरठ से 170 किमी दूर संभल-बहजोई हाईवे के कोल्ड स्टोरेज पहुंची। ये कांग्रेस नेता मुशीर खां तरीन का है। यहां मुनीम अबरार खां ने जहरीला नया आलू बनाने से लेकर सप्लाई तक का खुलासा किया.
अगले दिन हम संभल से 50 किलोमीटर दूर गुन्नौर के DL कोल्ड स्टोरेज पहुंचे। यहां आलू पर पीली मिट्टी लगाकर नकली नया आलू बना रहे थे। यहां हमारी मुलाकात स्टोरेज के मैनेजर महेंद्र पाल से हुई. रिपोर्टर: क्या रेट चल रहा है?
महेंद्र पाल: एक बोरी (50 किलो) आलू 600 रुपए में दिल्ली पहुंचा देते हैं। सीजन में 30-35 रुपए किलो फुटकर में बिकता है। सीजन से पहले 80 रुपए किलो तक बिक जाएगा।.
महेंद्र पाल: 1200 रुपए क्विंटल पड़ेगा।.
हनीफ: इसमें 3 तरह की मिट्टी है। पहली- जर्मनी मिट्टी। दूसरी कत्थे वाली मिट्टी और तीसरी राजस्थानी मिट्टी।.
Taken together, the developments around भास्कर इन्वेस्टिगेशनजमीन में नहीं, केमिकल से पैदा हो रहा नया आलू: 4 point to a situation that is still moving, and the coming days should bring more clarity.




