भास्कर एक्सप्लेनरप्रोटेस्ट अधिकार है, फिर परमिशन क्यों जरूरी: पुलिस उठा ले तो क्या करें, गिरफ्तारी और हिरासत में क्या फर्क; 8 सवालों में पूरी कहानी3:40Play video

Sun, Oct 11, 2026Updated 05: 55 AM IST. भास्कर एक्सप्लेनर.

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Key points

  • सवाल-5: धारा 163 क्या है और क्या इसे चुनौती दी जा सकती है?
  • सवाल-4: परमिशन न मिलने पर क्या रास्ता है? जवाबः 2 रास्ते हैं.
  • सवाल-1: क्या प्रोटेस्ट मौलिक अधिकार है?
  • सवाल-2: क्या प्रोटेस्ट के लिए पुलिस परमिशन जरूरी है?
  • सवाल-3: प्रोटेस्ट के लिए दिल्ली पुलिस के नियम क्या हैं?

10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर पुलिस एक्शन जारी है। अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को फ्लाइट से उठा लिया गया। अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और पिनाराई विजयन जैसे पूर्व सीएम भी हिरासत में लिए गए हैं। अन्य प्रदर्शनकारी भी पकड़े.

पुलिस का कहना है कि इस प्रोटेस्ट को परमिशन नहीं दी है और दिल्ली में BNS की धारा 163 लागू है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट सभी नागरिकों का हक है।.

क्या प्रोटेस्ट मौलिक अधिकार है, अगर हां तो फिर पुलिस की अनुमति क्यों जरूरी, हिरासत और गिरफ्तारी में फर्क क्या है; ऐसे 8 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में.

जवाबः हां, संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में बोलने और अपनी बात कहने की आजादी है। अनुच्छेद 19(1)(b) में बिना हथियार, शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का अधिकार है।.

हालांकि यह अधिकार असीमित नहीं है। अनुच्छेद 19(3) कहता है कि सरकार 'लोक व्यवस्था' के लिए इस पर उचित पाबंदियां लगा सकती है।.

जवाबः हां, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) बनाम भारत सरकार केस में यह साफ किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करके अपनी शिकायतें सही जगह तक पहुंचाना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। पुलिस कमिश्नर या उनके अधिकृत अफसर से पहले अनुमति लेने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।.

CJP प्रोटेस्ट के बुलावे पर आ रहे लोगों को सुबह से ही दिल्ली पुलिस हिरासत में ले रही है।.

इस मामले में पुलिस का तर्क है कि CJP ने 7 अक्टूबर को आवेदन किया, यानी प्रदर्शन से सिर्फ 3 दिन पहले। इसलिए उन्हें परमिशन नहीं दी जा सकती।.

दिल्ली पुलिस की जॉइन्ट कमिश्नर नूपुर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बताया कि CJP को 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी गई है।.

जवाबः पुलिस के पास प्रदर्शन को रोकने का एक और हथियार है, निषेधाज्ञा। पहले इसे CrPC की धारा 144 कहते थे। अब यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 है।.

इसमें मजिस्ट्रेट लिखित आदेश देकर किसी इलाके में 5 या उससे ज्यादा लोगों के जमा होने पर रोक लगा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर को पूरी नई दिल्ली में धारा 163 लगाई थी।.

इसके खिलाफ भी रास्ता है। धारा 163(5) के तहत प्रभावित व्यक्ति आदेश जारी करने वाले मजिस्ट्रेट से उसे रद्द करने या बदलने की अर्जी दे सकता है। मजिस्ट्रेट को सुनवाई का जल्दी मौका देना होता है और अर्जी खारिज करे तो कारण लिखित में बताने होते हैं।.

सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक, 'धारा-163 को चुनौती देने के बाद यदि उसे रद्द करने का आदेश नहीं मिलता तो 5 से ज्यादा लोगों का जुटना या प्रदर्शन करना गैर-कानूनी है। हालांकि विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार, इंटरनेट बंदी और सार्वजनिक यातायात को बंद करने से आम लोगों के मौलिक अधिकारों के हनन जैसे ग्राउंड्स पर भी धारा-163 को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।'.

सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है कि ऐसे आदेश मनमाने ढंग से नहीं दिए जा सकते। 2012 के रामलीला मैदान मामले में कोर्ट ने कहा कि निवारक कदम असली और गंभीर खतरे पर आधारित होने चाहिए और बहुत सावधानी से लिए जाने चाहिए। 1961 के बाबूलाल पाराटे केस में संविधान पीठ ने कहा था कि प्रभावित लोगों को मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने का हक है।.

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस समेत सेंट्रल दिल्ली के अहम इलाकों में धारा 163 लागू की है।.

सवाल-6: परमिशन के बिना प्रदर्शन किया तो क्या हो सकता है?

जवाबः भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का केस बन सकता है। यह पुरानी IPC की धारा 188 का नया रूप है। सजा में जेल या जुर्माना हो सकता है। पुलिस हिरासत में लेकर बिना किसी कानूनी कार्रवाई के भी कहीं दूर ले जाकर छोड़ सकती है।.

सवाल-7: हिरासत और गिरफ्तारी में क्या फर्क है?

हिरासत शब्द की BNSS में कोई सीधी परिभाषा नहीं है। कानून पुलिस को ऐसी शक्तियां देता है, जिनसे वह लोगों को रोक सकती है, हटा सकती है या कुछ समय के लिए अपने पास रख सकती है।.

सवाल-8: हिरासत या गिरफ्तारी में आपके अधिकार क्या हैं? जवाबः 5 बातें जाननी चाहिए. ये खबर भी पढ़िए.

'ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो' इस स्लोगन के साथ राहुल गांधी ने इलेक्शन कमीशन की तरफ कूच किया। कहा कि उनके साथ लोकसभा-राज्यसभा के करीब 300 विपक्षी सांसद सड़क पर हैं। राहुल को हिरासत में लेने की कोशिश हुई, तो आकाशवाणी भवन में बैठ गए। 8 घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पूरी खबर पढ़िए.

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