भास्कर एक्सप्लेनरभारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें: खतरे में 6 प्रदेश, 'ग्लेशियल लेक' अचानक कैसे फट जाती हैं3:18Play video

भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें: खतरे में 6 प्रदेश, 'ग्लेशियल लेक' अचानक कैसे फट जाती हैं.

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भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें: खतरे में 6 प्रदेश, 'ग्लेशियल लेक' अचानक कैसे फट जाती हैं.

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Key points

  • 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश.
  • 1. ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना.
  • 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना.
  • 3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना.
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26 अगस्त की सुबह 9 बजे। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई। कुछ ही मिनटों में सड़कें, इमारतें, गांव बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत-अमेरिका समेत 26 देशों के नागरिक शामिल हैं। रात 9 बजे तक 95 मौतों की प.

शुरुआती आकलन के मुताबिक, तबाही की वजह 'ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड' यानी GLOF है। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है। GLOF की जद में भारत के भी कई इलाके हैं।.

IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी।.

669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी 'ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड' का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को 'बेहद ज्यादा खतरनाक', 18 को 'ज्यादा खतरनाक' और 26 को 'मध्यम खतरनाक' श्रेणी में रखा गया है।.

अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1, 385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं।.

इसी तरह सतलुज झील से 3, 507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है।.

हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है।.

इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी 'डैम' रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं।.

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर तिब्बत के रसुवागढ़ी बॉर्डर पॉइंट पर CCTV कैमरे में बाढ़ का भयावह दृश्य कैद हुआ। यहीं से बाढ़ नेपाल में घुसी।.

ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं.

3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना. GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है?

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक.

2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी।.

इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए।.

पानी के भारी दबाव और संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं।.

नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें: पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे.

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For now, भास्कर एक्सप्लेनरभारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें: खतरे remains the part of the story worth watching, and further updates are likely as more details are confirmed.

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