स्पाई फाइल्सशहीदों की लाशें तोड़-तोड़कर हेलिकॉप्टर में भरी गईं: ‘सत श्री अकाल’ कहकर ग्रेनेड उछाला, पाकिस्तानी बंकर तबाह; 3 नाकामी के बाद सियाचिन फतह, पार्ट-24:47Play video

शहीदों की लाशें तोड़-तोड़कर हेलिकॉप्टर में भरी गईं: 'सत श्री अकाल' कहकर ग्रेनेड उछाला, पाकिस्तानी बंकर तबाह; 3 नाकामी के बाद सियाचिन फतह, पार्ट-2.

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स्पाई फाइल्सशहीदों की लाशें तोड़-तोड़कर हेलिकॉप्टर में भरी गईं: ‘सत श्री अकाल’ कहकर ग्रेनेड उछाला, पाकिस्तानी बंकर तबाह; 3 नाकामी के बाद सियाचिन फतह, पार्ट-24:47Play video

शहीदों की लाशें तोड़-तोड़कर हेलिकॉप्टर में भरी गईं: 'सत श्री अकाल' कहकर ग्रेनेड उछाला, पाकिस्तानी बंकर तबाह; 3 नाकामी के बाद सियाचिन फतह, पार्ट-2.

Article outline

  1. What happened
  2. The key numbers
  3. The details
  4. A closer look
  5. More on the story
  6. The bottom line

Key points

  • 31 मार्च 1984.उधमपुर का नॉर्दन कमांड सेंटर।.
  • साल 1984, चीता हेलिकॉप्टर से सियाचिन में उतरते हिंदुस्तानी फौजी।.
  • 38 मिनट पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र. कॉपी लिंक.
  • दूसरी तरफ से कोड वर्ड में मैसेज आया- 'अबाबील. अबाबील.
  • 'तारीख क्या तय करें सर?' DGMO ने पूछा।.

दैनिक भास्कर की 'स्पाई फाइल्स' सीरीज में आप पढ़ रहे हैं- 'ऑपरेशन मेघदूत।' पार्ट-1 में आपने पढ़ा- पाकिस्तान भारत का नक्शा बदलकर सियाचिन पर कब्जा जमाना चाहता था। उसकी फौज चुपचाप इलाके की रेकी कर चुकी थी और अब वहां पक्के बंकर बनाने की तैयारी में थी। तार.

फरवरी 1984 की एक सर्द रात। दिल्ली के लोधी रोड में RAW का दफ्तर। घड़ी में रात के 11 बज रहे थे। अचानक मॉनिटर स्क्रीन जल उठी। बीप-बीप की आवाजें गूंजने लगीं। ड्यूटी अफसर ने तुरंत हेडफोन कान में लगाया।.

दूसरी तरफ से कोड वर्ड में मैसेज आया- 'अबाबील. अबाबील. 62 ब्रिगेड हेडक्वार्टर से सभी यूनिट्स। परिंदे उड़ने के लिए तैयार हैं। टाइमलाइन- अप्रैल का दूसरा-तीसरा हफ्ता। रिपीट, अप्रैल का दूसरा-तीसरा हफ्ता। टारगेट- सियाचिन।'.

अफसर ने रिकॉर्डिंग रील पीछे घुमाई, मैसेज री-कन्फर्म किया। इनपुट 100% पक्का था। उसने हॉटलाइन का रिसीवर उठाया।.

DGMO ने कहा, 'लेकिन सर, ग्राउंड सिचुएशन बहुत खराब है। बर्फबारी रुकी नहीं है। तापमान माइनस 50 डिग्री है।'.

'आप अपनी यूनिट्स को मूव करने के लिए तैयार रखिए। D-Day की तारीख सही वक्त पर दी जाएगी।'.

दिल्ली के साउथ ब्लॉक में आर्मी चीफ और अफसरों की मीटिंग। AI इमेज.

जनरल छिब्बर ने रिसीवर उठाया। दूसरी तरफ से सीधे आर्मी चीफ की आवाज गूंजी- '13 अप्रैल 1984, बैसाखी का दिन। जब पूरा देश त्योहार मना रहा होगा, हमारे जांबाज सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर तिरंगा फहराएंगे।'.

कमांड सेंटर से तुरंत ऑपरेशन का हुक्म जारी हुआ। कैप्टन संजय कुलकर्णी को '4 कुमाऊं' की एक प्लाटून के साथ 'बिलाफोंड ला' पर कब्जा करने का जिम्मा मिला। जबकि मेजर बहुगुणा की टुकड़ी को 'सिया ला' की ओर बढ़ने का आदेश दे दिया गया।. 13 अप्रैल 1984.

तभी कैप्टन कुलकर्णी ने 25 किलो आटे की एक बोरी नीचे फेंक दी। बोरी बिना धंसे सख्त बर्फ पर टिक गई। अंदाजा सही निकला- बर्फ जवानों के कूदने लायक जमी हुई थी।.

ऑपरेशन पूरी रफ्तार में था। दोपहर होते-होते दोनों हेलिकॉप्टरों ने 17 उड़ानें पूरी कर लीं। कैप्टन कुलकर्णी, एक जीओसी और 27 जवान बिलाफोंड ला पर अपने जमा चुके थे।.

अचानक मौसम बिगड़ गया। विजिबिलिटी गिरकर जीरो पर पहुंच गई। तापमान माइनस 40 डिग्री तक लुढ़क चुका था। इतनी सर्दी की अगर आंसू निकले तो गालों पर जम जाए और खौलता पानी हवा में उछालो तो फर्श पर गिरने से पहले बर्फ बन जाए।.

अब तक पाकिस्तान इस मिशन से बेखबर था। वह अपनी तय तारीख यानी 17 अप्रैल के हिसाब से ही तैयारी में जुटा था।.

ब्रिगेडियर परवेज मुशर्रफ SSG कमांडोज की टीम लेकर सियाचिन के लिए निकल चुके थे। पीछे-पीछे नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री की टुकड़ी भी आ रही थी।.

For now, स्पाई फाइल्सशहीदों की लाशें तोड़-तोड़कर हेलिकॉप्टर में भरी गईं: 'सत श्री अकाल' remains the part of the story worth watching, and further updates are likely as more details are confirmed.

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