स्पाई फाइल्सप्रेमी-प्रेमिका बनकर लाहौर पहुंचे, ISI एजेंट को 9 गोलियां मारीं: भारतीय जासूसों ने कैसे लिया खालिस्तानियों से बदला; ऑपरेशन हॉरनेट पार्ट-24:18Play video
प्रेमी-प्रेमिका बनकर लाहौर पहुंचे, ISI एजेंट को 9 गोलियां मारीं: भारतीय जासूसों ने कैसे लिया खालिस्तानियों से बदला; ऑपरेशन हॉरनेट पार्ट-2.
प्रेमी-प्रेमिका बनकर लाहौर पहुंचे, ISI एजेंट को 9 गोलियां मारीं: भारतीय जासूसों ने कैसे लिया खालिस्तानियों से बदला; ऑपरेशन हॉरनेट पार्ट-2.
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Key points
- 14 मिनट पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र. कॉपी लिंक.
- RAW के लिए काम करने वाली सोफी। AI इमेज.
- RAW अफसर संजीव जिंदल। AI इमेज.
दैनिक भास्कर की सीरीज स्पाई फाइल्स में आप पढ़ रहे हैं- ऑपरेशन हॉरनेट। पार्ट-1 में आपने पढ़ा- प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारत की खुफिया एजेंसी को एक मिशन दिया गया- खालिस्तानी नेटवर्क का खात्मा। निशाने पर दो लोग थे- ISI एजेंट अब्दुल खान.
इस सीक्रेट ऑपरेशन की कमान RAW के दो धुरंधरों के हाथों में थी। पेरिस से संजीव जिंदल और दिल्ली दफ्तर से अनुज भारद्वाज। नारायणन, क्लार्क और सोफी उनके ऐसे मोहरे थे, जो मौत के मुहाने पर खड़े रहने के आदी थे।.
ISI वाले अलग-अलग देशों में पाकिस्तानी अफसर बनकर बैठे थे। लिहाजा ये मिशन बेहद खतरनाक था। कई बार शिकार हाथ आ गए, लेकिन फिर रेत की तरह फिसल भी गए। आगे की कहानी पार्ट-2 में पढ़िए.
बात जनवरी 1985 की है। पेरिस का एक सेफ हाउस, यानी ऐसा गुप्त ठिकाना, जहां से भारतीय खुफिया एजेंसी RAW का ऑपरेशन चलता था।.
हरबख्श और संधू दोनों ISI के मोहरे थे, जिन्हें अब्दुल खान भारत में खालिस्तानी चरमपंथ फैलाने के लिए ट्रेनिंग और फंड मुहैया करा रहा था।. RAW अफसर संजीव जिंदल। AI इमेज.
अप्रैल 1985 के अंत में संजीव का फोन बजा। 'हाय सोफी! कहां गायब थी तुम? जिंदा भी हो या नहीं?' संजीव ने पूछा।.
In short, स्पाई फाइल्सप्रेमी-प्रेमिका बनकर लाहौर पहुंचे, ISI एजेंट को 9 गोलियां मारीं: भारतीय is the central thread here, and readers can expect follow-up reporting as the picture becomes clearer.




