आज का एक्सप्लेनर: शाहरुख-अजय को नोटिस, 3 महीने में 1100 छापे, खराब खाना खिलाने वालों के दुश्मन IAS तुकाराम मुंढे की कहानी
आज का एक्सप्लेनर:शाहरुख-अजय को नोटिस, 3 महीने में 1100 छापे, खराब खाना खिलाने वालों के दुश्मन IAS तुकाराम मुंढे की कहानी2 मिनट पहलेलेखक: श्रेया नाकाड़ेकॉपी लिंकमुंबई के एक पॉश रेस्टोरेंट के फोन की घंटी बजी। टेबल बुक करने के लिए सामान्य कॉल थी, लेकिन मैनेजर का चेहरा उतर गया। बुकिंग तुकाराम मुंढे के नाम से…
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मुंबई के एक पॉश रेस्टोरेंट के फोन की घंटी बजी। टेबल बुक करने के लिए सामान्य कॉल थी, लेकिन मैनेजर का चेहरा उतर गया। बुकिंग तुकाराम मुंढे के नाम से थी।
इसके बाद रेस्टोरेंट के किचन में हर चीज दोबारा चेक होने लगी। स्टोररूम की सफाई, फ्रिज का तापमान, सामान की एक्सपायरी डेट। मैनेजर ने अपने संपर्कों को भी कॉल लगाना शुरू कर दिया।
इधर तुकाराम मुंढे के पास भी एक दोस्त का फोन पहुंचा- ‘क्या तुमने रेस्टोरेंट में बुकिंग की है?’ मुंढे हैरान होकर जवाब देते हैं, ‘नहीं, लेकिन आज मेरे बेटे का जन्मदिन है। शायद उसने अपने दोस्तों के लिए टेबल बुक की होगी।’
ये किस्सा खुद मुंढे ने एक इंटरव्यू में सुनाया।
What happened
तुकाराम मुंढे ने महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA कमिश्नर बनने के 3 महीने के भीतर 1100 से ज्यादा छापे मारे और 165 लाइसेंस सस्पेंड किए। पूरे प्रदेश में नकली पनीर पर बैन लगाया। हाईकोर्ट की अपनी कैंटीन तक नहीं बख्शी।
अब सीधे बॉलीवुड के तीन बड़े सितारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल के ऐड के लिए नोटिस जारी किया है। सोशल मीडिया पर इन्हें ‘रियल लाइफ सिंघम’ का टैग दिया जा रहा है।
आज के एक्सप्लेनर में IAS तुकाराम मुंढे की पूरी कहानी, जिनकी 21 साल की सर्विस में 25 तबादले हो चुके हैं…
महाराष्ट्र का बीड जिला। महज 5,000 की आबादी वाला ताडसोन्ना गांव। यहीं एक किसान परिवार में 3 जून 1975 को तुकाराम मुंढे का जन्म हुआ। महाराष्ट्र का यह इलाका अक्सर सूखे से परेशान रहता है। कभी खेती के लिए पानी नहीं, पानी रहा तो सिंचाई के लिए बिजली नहीं। ऊपर से परिवार पर पुराना कर्ज।
The details
महज तीसरी क्लास से मुंढे को पढ़ाई के साथ-साथ खेती शुरू करनी पड़ी। वो दिन में अपने पोलियोग्रस्त भाई को कंधे पर बैठाकर बिना चप्पल स्कूल जाते। रात में बिजली आती, तो खेत सींचने उठना पड़ता। साप्ताहिक बाजार में सिर पर सब्जियां लादकर बेचने भी जाते।
यह सिलसिला 10वीं कक्षा तक चलता रहा। मुंढे के बड़े भाई अशोक मुंढे की औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजी नगर) में नौकरी लग गई, तो उन्होंने छोटे भाई को अपने पास ही बुला लिया।
मुंढे ने औरंगाबाद से ही साइंस में 12वीं की। फिर बीए में एडमिशन ले लिया और 1996 में यूनिवर्सिटी टॉपर रहे। भाई ने UPSC की किताबें खरीदने और कोई अच्छी कोचिंग ढूंढने दिल्ली भेज दिया।
मुंढे एक इंटरव्यू में बताते हैं, ‘दिल्ली में 3-4 दिन ठहरना था। मैं किताबें खरीदकर होटल में ठहरा था। वहां अटेंडर ने पूछा, ‘सर बियर लेंगे?’ मैं कहा- क्या तुम्हें बियर लेने वाला लगता हूं? उसी वक्त अपना सारा सामान उठाकर बिना टिकट वापस औरंगाबाद लौट आया।’
Why it matters
मुंढे ने 1997 में UPSC की परीक्षा दी, लेकिन पास नहीं हुए। 1999 में इंटरव्यू तक पहुंचे। बीए में टॉप करने वाले मुंढे एमए में सिर्फ 57% नंबर ला सके। मुंढे ने UPSC का सपना छोड़ा और महाराष्ट्र PSC की परीक्षा पास कर सेकंड क्लास अफसर बन गए।
मुंढे के इस फैसले से भाई अशोक खुश नहीं थे। उन्होंने बात तक करनी बंद कर दी। इसके बाद मुंढे ने वापस UPSC की परीक्षा दी और 2005 में ऑल इंडिया रैंक-20 लेकर आए।
मुंढे बताते हैं, ‘उस साल महाराष्ट्र से 4 लोगों ने IAS की परीक्षा पास की थी। अगले दिन के अखबार में 3 लोगों की फोटो छपी थी। मेरी नहीं छपी थे। मेरे नाम के आगे खाली बॉक्स था। कोई मुझे जानता ही नहीं था।’
तुकाराम मुंढे की पहली पोस्टिंग बतौर असिस्टेंट कलेक्टर सोलापुर में हुई। यहां रेत माफियों पर कार्रवाई की, तो उन पर जानलेवा हमला हो गया। फिर…
Background
तुकाराम मुंढे के काम करने के इन तरीके से उनके जूनियर अफसरों से लेकर नेता भी परेशान रहते हैं। उन पर काम का दबाव डालने, ड्यूटी के समय से ज्यादा काम करवाने और छुट्टियों के दिन भी काम करवाने के आरोप लगते आए हैं।
2016 में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी आया था। तब मुंबई के एक मेयर सुधाकर सोनवाने ने कहा था, ‘इस कमिश्नर के मन में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए बिल्कुल सम्मान नहीं है।’
21 साल की सेवा में 25 बार मुंढे का ट्रांसफर हो चुका है। यानी औसतन हर 10 महीने में उन्हें अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर दूसरे ठिकाने पर भेज दिया जाता है।
25 मई 2026 में मुंढे को महाराष्ट्र का FDA कमिश्नर बनाया गया। पहले हफ्ते में ही उन्होंने प्रतिबंधित या लो ग्रेड का सामान बेच रहे 50 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे और 100 लोगों को गिरफ्तार किया। फिर नकली शराब, गुटखा, पान मसाला, नकली मिठाई, नकली पनीर, आइसक्रीम, मानकों का पालन नहीं कर रहे रेस्टोरेंट्स पर छापे मारे…
What comes next
मुंढे के कार्यकाल में FDA 1100 से ज्यादा छापे मार चुका है। 3100 से ज्यादा निरीक्षण हुए हैं। 165 लाइसेंस सस्पेंड किए हैं। 50 करोड़ से ज्यादा का माल जब्त कर चुके हैं।
इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने FDA पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया है। दरअसल FDA ने जून में पुणे की एक मिठाई दुकान का लाइसेंस सस्पेंड किया था। जुलाई में दोबारा जांच करने पर दुकान 98% नियमों का पालन कर रही थी, लेकिन लाइसेंस सस्पेंशन का आदेश खारिज नहीं किया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने FDA पर फाइन लगाया है।
तुकाराम मुंढे पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। उनके बड़े भाई अशोक मुंढे डिप्टी कमिश्नर पद से रिटायर हुए हैं। उनके काम के चलते जितने प्रशंसक है, उतने दुश्मन भी। कई बार तो परिवार को तक जान से मारने की धमकियां आ चुकी हैं। लेकिन मुंढे कहते हैं कि उन्हें इनसे फर्क नहीं पड़ता।
तबादलों की चिंता नहीं करते: मुंढे कहते हैं कि तबादले सरकारी सेवा का हिस्सा होते हैं, मैं इसकी चिंता किए बिना अपना काम करता हूं। तबादला बदलाव लाने का एक नया मौका होता है।
नियम के दायरे में रहते हैं: मुंढे कहते हैं, ‘मैं नियमों के दायरे में रहकर काम करता हूं। मैं किसी को नियमों के खिलाफ जाकर काम करने के लिए मजबूर नहीं करता। पहले जो काम नहीं हो रहा था, उसे नियमानुसार शुरू किया गया है।’
मुझे कोई रिश्वत देने की हिम्मत नहीं कर सकता: एक इंटरव्यू में मुंढे से पूछा गया कि क्या आपको कभी रिश्वत देने की कोशिश की गई है? उन्होंने जवाब दिया, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसी हिम्मत करेगा। अगर कोई ऐसा करना चाहता है, तो 100 बार सोच ले।’
न्याय करना ही मकसद: मेरा काम करने का एक ही तरीका है- सही या गलत। अगर कोई चीज सही है तो मैं वो करुंगा। अगर गलत है तो नहीं करुंगा। न्याय करना ही मेरा मकसद है।
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रिसर्च सहयोग: आदित्य रवि
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