ग्राउंड रिपोर्ट17 दिन में दो धमकी भरे लेटर, कश्मीरी पंडित डरे: बोले- नाम, पता, गाड़ी नंबर भी लीक, 37 साल बाद भी घर लौटना मुश्किल1:58Play video
17 दिन में दो धमकी भरे लेटर, कश्मीरी पंडित डरे: बोले- नाम, पता, गाड़ी नंबर भी लीक, 37 साल बाद भी घर लौटना मुश्किल. श्रीनगर14 मिनट पहलेलेखक: रऊफ डार. कॉपी लिंक.
17 दिन में दो धमकी भरे लेटर, कश्मीरी पंडित डरे: बोले- नाम, पता, गाड़ी नंबर भी लीक, 37 साल बाद भी घर लौटना मुश्किल. श्रीनगर14 मिनट पहलेलेखक: रऊफ डार. कॉपी लिंक.
Article outline
- What happened
- The details
- A closer look
- More on the story
- The bottom line
Key points
- 'जब 6 हजार कर्मचारी ही सेफ नहीं, तो वापसी कैसे होगी'.
- एप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें.
- पूरी खबर पढ़ें ऐप परप्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें. वीडियोऔर देखें.
कश्मीरी पंडित इस धमकी भरे लेटर से दहशत में हैं। अपनी जमीन छोड़ने के 37 साल बाद भी उनका खौफ कम नहीं हुआ है। लेटर में सिर्फ कश्मीरी पंडितों के नाम ही नहीं, उनके घर का पता, गाड़ी का रंग और रजिस्ट्रेशन नंबर तक लिखा है। निजी जानकारी लीक होने के बाद कश्मीरी पंडितों का डर और बढ़ गया है। वे जांच और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।.
टेलीग्राम चैनल के जरिए ये लेटर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) ने भेजा था, जिसे खुफिया एजेंसियां लश्कर का मुखौटा संगठन मानती हैं। वे आतंकियों की प्रॉपर्टी जब्त किए जाने से नाराज हैं। ULC ने सरकारी विभागों और कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने का दावा किया है। जिसके बाद लोकल प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों और कश्मीरी पंडितों को वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए हैं।.
कश्मीरी पंडित बोले. 'जब 6 हजार कर्मचारी ही सेफ नहीं, तो वापसी कैसे होगी'.
40 साल के साहिल रैना कश्मीरी पंडित हैं। वे अनंतनाग में रहते हैं और रेवेन्यू डिपार्टमेंट में काम करते हैं। साहिल कहते हैं, 'सोशल मीडिया पर नाम के साथ ऐसी धमकियां देखकर डर लगता है। 90 के दशक में भी हमारा परिवार इन सब से गुजरा था और हमें कश्मीर छोड़ना पड़ा था। अब घर के बुजुर्ग और माता-पिता डरे हुए हैं। हम नहीं चाहते कि इतिहास फिर दोहराया जाए।'.
साहिल के मुताबिक, सरकार कश्मीरी पंडितों को घाटी में दोबारा बसाने की बात करती है, लेकिन PM पैकेज के तहत करीब 6 हजार कर्मचारी ही यहां ठीक से नहीं बस सके हैं। संसद में करीब 3 हजार मकान दिए जाने की बात कही गई है, लेकिन कई परिवारों को अब तक नहीं मिले।'.
साहिल नागरिक समाज और NGOs से भी धमकियों की निंदा करने की अपील करते हैं। साथ ही मांग करते हैं कि अगर सरकार सुरक्षा नहीं दे सकती, तो कर्मचारियों को आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार और ट्रेनिंग दी जाए।'.
'एजेंसियों को इन धमकियों की जड़ तक पहुंचना चाहिए। खासकर तब, जब लेटर में लोगों के नाम-पते तक लिखे हों। कश्मीरी पंडितों के परिवार में डर का माहौल है, लेकिन इन धमकियों से हमारा मनोबल नहीं टूटेगा। हमने 400 साल से ज्यादा का इतिहास देखा है। कश्मीरी पंडित न कभी झुके हैं, न झुकेंगे'.
संगठन पनुन कश्मीर के संस्थापक-संयोजक डॉ. अग्निशेखर विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए अलग जमीन की मांग करते हैं। उनका कहना है कि सरकारें लाखों टूरिस्ट्स आने और हालात सामान्य होने का दावा करती हैं। अगर सब कुछ बदल गया है, तो कश्मीरी पंडित अब भी यहां से बाहर क्यों हैं? आर्टिकल-370 हटने के बाद भी उनकी वापसी और पुनर्वास क्यों नहीं हो सका।'.
अग्निशेखर दावा करते हुए कहते हैं, 'आतंकवाद का नेटवर्क और इकोसिस्टम अब भी मौजूद है। आतंकवाद का स्वरूप बदला है और हाइब्रिड आतंकवाद जैसे नए खतरे सामने हैं। हाल में मिली धमकियां PM पैकेज के तहत कश्मीर लौटे कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। अगर ये कर्मचारी और उनके परिवार सुरक्षित नहीं, तो हम किसकी वापसी की बात कर रहे हैं।'.
पूरी खबर पढ़ें ऐप परप्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें. वीडियोऔर देखें. Our Divisions This website follows the DNPA Code of Ethics. फीडबैक दें. Our Group Site Links.
In short, ग्राउंड रिपोर्ट17 दिन में दो धमकी भरे लेटर, कश्मीरी पंडित डरे: बोले- is the central thread here, and readers can expect follow-up reporting as the picture becomes clearer.




