ब्लैकबोर्ड-नाचने से ज्यादा किसी के साथ सोकर कमा लेगी: बेटी को देखकर बोला- इसे भी साथ लाना; वो डांसर जो बिन शादी के मां बन गईं3:06Play video
ब्लैकबोर्ड-नाचने से ज्यादा किसी के साथ सोकर कमा लेगी: बेटी को देखकर बोला- इसे भी साथ लाना; वो डांसर जो बिन शादी के मां बन गईं.
ब्लैकबोर्ड-नाचने से ज्यादा किसी के साथ सोकर कमा लेगी: बेटी को देखकर बोला- इसे भी साथ लाना; वो डांसर जो बिन शादी के मां बन गईं.
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रात करीब डेढ़ बजे का वक्त था। तेज आवाज में गाने बज रहे थे। मैं घाघरा-चोली पहने स्टेज पर थी। 100 मर्दों के बीच नाच रही थी। तीन घंटे से नाचते-नाचते शरीर थक चुका था। भीड़ से एक मर्द स्टेज पर चढ़ आया। दुपट्टा खींचा और कमर में हाथ डाल दिया। मैं घबरा गई।.
खुद को संभालते हुए उसे धक्का दिया। उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी ओर खींच लिया। मैंने जोर से धक्का देकर उसे स्टेज से नीचे गिरा दिया। फिर नाचने लगी। 15 मिनट बाद वो फिर स्टेज पर आया और घाघरे पर ब्लेड मार दिया। मैं कुछ समझ पाती उससे पहले ही उसने दूसरा वार बांह पर किया। एक गहरा घाव हुआ और खून बहने लगा।.
मैंने पूछा- कितने साल हो गए डांस करते हुए। वो धीरे से बोलीं- 'इतनी गिनती तो आती नहीं है, लेकिन जब 12 साल की थी तबसे नाचना शुरू किया। पापा को मर्डर केस में उम्रकैद हो गई थी। घर में कोई कमाने वाला नहीं था। भरपेट खाना नहीं मिलता था। बगल में रेखा दीदी रहती थीं। अक्सर शाम में घाघरा-चोली पहनकर कहीं जाया करती थीं और सुबह घर लौटती थीं। पूछने पर कहती थीं कि पैसे कमाने जाती हूं।.
रातभर नाचने के 150 रुपए मिले। सुबह घर लौटी तो पैसे मां को देते हुए कहा- सबके लिए रोटी बना लो।.
जब मैं 17-18 साल थी तब रेखा बाई ने मुझसे भी यही काम करने को कहा। उसने एक आदमी से मेरे बदले एक लाख रुपए लिए। फिर जबरदस्ती उसके साथ भेजने लगी। मैं उसके घर से बचकर भाग निकली। उसके बाद से मैं रेखा बाई के साथ कभी नहीं गई। अकेले ही नाचने जाने लगी।'.
भूरी बाई आगे बताती हैं- 'एक दिन करीब 30 साल की उम्र का एक आदमी स्टेज के ठीक सामने खड़ा था। मैं जब तक नाचती रही वो शख्स वहां से हिला नहीं। उसके बाद लगातर 15 दिन तक वो डांस देखने आता रहा।.
भूरी बाई को बीच में टोकते हुए मैंने पूछा- अभी बच्चे कहां हैं? वो बोलीं- एक बेटा दूसरे शहर कमाने गया है। दो बच्चे यहीं हैं। एक 18-19 साल की बेटी और दूसरा 12-13 साल का बेटा।.
जब बच्चे कमरे में आएंगे, तो मुझसे कुछ मत पूछिएगा। खराब लगता है। 20-25 साल हो गए इस घुंघरू का बोझ ढोते-ढोते। बेटी बीए सेकंड ईयर में है। हॉस्टल में रहकर पढ़ती है। इन दिनों घर आई हुई है। अब कोई ढंग का लड़का देखकर शादी कर दूंगी। मर जाऊंगी, लेकिन इसे कभी नाचने के लिए नहीं भेजूंगी। कभी नहीं चाहूंगी कि मेरे जैसी जिंदगी बेटी को मिले।.
Taken together, the developments around ब्लैकबोर्ड-नाचने से ज्यादा किसी के साथ सोकर कमा लेगी: बेटी को देखकर point to a situation that is still moving, and the coming days should bring more clarity.




