साइबर लिटरेसी- सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो न डालें: गलत इस्तेमाल का रिस्क, पुलिस की एडवाइजरी और पेरेंट्स के लिए 10 सेफ्टी टिप्स1:34Play video
साइबर लिटरेसी- सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो न डालें: गलत इस्तेमाल का रिस्क, पुलिस की एडवाइजरी और पेरेंट्स के लिए 10 सेफ्टी टिप्स.
साइबर लिटरेसी- सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो न डालें: गलत इस्तेमाल का रिस्क, पुलिस की एडवाइजरी और पेरेंट्स के लिए 10 सेफ्टी टिप्स.
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- ध्यान रहे- DPDP एक्ट के बच्चों से जुड़े ये प्रावधान 13 मई 2027 से लागू होंगे।.
- 8 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल. कॉपी लिंक.
- सवाल- जियोटैग (Geotag) क्या होता है और यह क्यों खतरनाक हो सकता है?
दरअसल, एक बार इंटरनेट पर फोटो-वीडियो अपलोड करने के बाद उस पर हमारा कंट्रोल नहीं रहता। कोई भी इनका गलत इस्तेमाल कर सकता है। AI और डीपफेक तकनीक के दौर में यह रिस्क और भी बढ़ गया है। कई बार फोटो में मौजूद छोटी-सी डिटेल (जैसे बच्चे या स्कूल का नाम और लोकेशन) अपराधियों के लिए बड़ा हथियार बन सकती है।.
इसी खतरे को देखते हुए पिछले दिनों असम पुलिस ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक एडवाइजरी जारी की। 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) ने भी स्कूलों और माता-पिता से सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़ी जानकारी शेयर करते समय सावधानी बरतने की अपील की है।.
McAfee के 2018 के 'द एज ऑफ कंसेंट' सर्वे के मुताबिक, भारत में अधिकांश माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी और संभावित खतरों के बारे में जानने के बावजूद सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें शेयर करते हैं। सर्वे के अनुसार.
जवाब- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल की मदद से अब किसी भी साधारण फोटो को डीपफेक वीडियो या आपत्तिजनक तस्वीरों (AI मॉर्फिंग) में बदला जा सकता है, जो बेहद डरावना है।.
जवाब- 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP एक्ट), 2023' में बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी को विशेष सुरक्षा दी गई है। एक्ट में प्रावधान है कि.
For now, साइबर लिटरेसी- सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो न डालें: गलत इस्तेमाल remains the part of the story worth watching, and further updates are likely as more details are confirmed.



