सोनिया गांधी प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनीं, किताब में बताएंगी: इसमें अपनों को खोने, राजनीति में आने के किस्से; 10 नवंबर को पब्लिश होगी0:48Play video
सोनिया गांधी प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनीं, किताब में बताएंगी:इसमें अपनों को खोने, राजनीति में आने के किस्से; 10 नवंबर को पब्लिश होगीन्यूयॉर्क12 मिनट पहलेकॉपी लिंककांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के संस्मरणों पर लिखी गई किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। प्रकाशक अल्फ्रेड ए नॉफ ने मंगलवार को घोषणा की।…
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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के संस्मरणों पर लिखी गई किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी। प्रकाशक अल्फ्रेड ए नॉफ ने मंगलवार को घोषणा की। किताब में सोनिया अपने राजनीति में सफर और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले से जुड़े अनुभव बताएंगी।
किताब में सोनिया ने इटली में बिताए बचपन से लेकर कैंब्रिज में राजीव गांधी से मुलाकात तक का जिक्र किया है। इसमें नेहरू-गांधी परिवार में शादी और परिवार में हुई हत्याओं के बाद बदली जिंदगी के बारे में लिखा है।
सोनिया ने लिखा- यह किताब परिवार की इंसानियत को समर्पित
सोनिया ने कहा कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनके इरादों, काम और मानवीय पहलुओं को उस तरह नहीं समझा गया। कई मायनों में यह किताब उनकी इंसानियत को समर्पित है। उनके मुताबिक, किताब उनके जीवन के साथ-साथ भारत में करीब छह दशकों के दौरान हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया भी देती है।
What happened
जब मैंने राजनीति से कुछ दूरी बनाकर पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखा, तो मुझे अपनी कहानी में प्यार और वफादारी का एक धागा साफ नजर आया। यह धागा इटली के एक छोटे शहर में बिताए साधारण बचपन से शुरू होकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए तक जाता है।
कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान राजीव गांधी से हुई थी मुलाकात
पति की हत्या के बाद भी सियासत से दूर ही रहीं
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद भी सोनिया राजनीति से दूर रहीं। पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। 1996 तक कांग्रेस कमजोर होने लगी और पार्टी में कई गुट बन गए। 1997 में कांग्रेस को एकजुट करने के लिए सोनिया ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। 62 दिन बाद 1998 में वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं। सोनिया 2017 तक अध्यक्ष रहीं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल है।
The details
2004 में PM की कुर्सी ठुकराई थी
2004 में कांग्रेस ने लेफ्ट सहित 15 दलों को साथ लेकर UPA (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस) बनाया। इस गठबंधन ने 335 सीटें जीतकर NDA को हराया दिया। UPA की सभी पार्टियों ने सोनिया को सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री चेहरा चुना।
हालांकि, NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की बागडोर सोनिया के हाथों में ही थी।
सोनिया की जगह मनमोहन के पीएम बनने पर संजय बारू लिख चुके किताब
Why it matters
डॉ. मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर रहे संजय बारू ने ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ नाम से किताब लिखी थी, बाद में इस पर फिल्म भी बनी। इसमें सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने से पीछे हटने और डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने के बाद का घटनाक्रम बताया गया है।
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Background
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