स्पाई फाइल्सचीन की जासूसी खातिर परमाणु उपकरण लगा रहे थे भारत-अमेरिका: बर्फीले तूफान में दिखा हिम मानव, खतरनाक डिवाइस पहाड़ पर छोड़कर भाग आए; पार्ट-14:27Play video
चीन की जासूसी खातिर परमाणु उपकरण लगा रहे थे भारत-अमेरिका: बर्फीले तूफान में दिखा हिम मानव, खतरनाक डिवाइस पहाड़ पर छोड़कर भाग आए; पार्ट-1.
चीन की जासूसी खातिर परमाणु उपकरण लगा रहे थे भारत-अमेरिका: बर्फीले तूफान में दिखा हिम मानव, खतरनाक डिवाइस पहाड़ पर छोड़कर भाग आए; पार्ट-1.
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- What happened
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- The bottom line
Key points
- सीक्रेट मिशन का नाम रखा गया- 'ऑपरेशन HAT', यानी High Altitude Training.
- 40 मिनट पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र. कॉपी लिंक.
- काव ने कोहली को गले लगाते हुए कहा- 'Congratulations Captain.'
- नंदा देवी पर्वत पर चढ़ाई के दौरान भारत-अमेरिका की टीम। AI इमेज.
जमीन से हजारों फीट ऊपर, बादलों के पार, भारत और अमेरिका मिलकर चीन की जासूसी कर रहे थे। वे 23 हजार फीट ऊंचे पहाड़ पर खतरनाक परमाणु उपकरण छोड़ आए। ऐसा उपकरण, जिसमें नागासाकी को तबाह करने वाले परमाणु बम में इस्तेमाल किए गए प्लूटोनियम का एक-तिहाई हिस्सा मौ.
23 जून 1965 की शाम। दिल्ली का पालम हवाई अड्डा, जो अब इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता है। रनवे के पास भीड़ जुटी थी। ढोल-नगाड़े बज रहे थे। भीड़ में सबसे आगे खड़े थे देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा।.
साढ़े चार बजे हवा को चीरता हुआ वायुसेना का डकोटा विमान रनवे पर उतरा। दरवाजा खुला और बाहर निकले 21 जांबाज।.
कोहली पीछे पहुंचे। वहां आरएन काव खड़े थे। चेहरे पर हल्की मुस्कान और पैनी निगाहें। काव तब IB की हवाई खुफिया विंग 'एविएशन रिसर्च सेंटर', यानी ARC के डायरेक्टर थे।.
15 अगस्त 1965 को भारत सरकार ने एवरेस्ट अभियान के नाम पर 15 पैसे का डाक टिकट जारी किया था।.
दो दिन बाद. 25 जून 1965, दिल्ली का एक सेफ हाउस। बंद कमरे में 5 लोग बैठे थे- कैप्टन कोहली, IB प्रमुख बीएन मलिक, ARC डायरेक्टर आरएन काव, अमेरिकी माउंटेनियर बैरी बिशप और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एक अफसर।.
तारीख बदली और वो घड़ी आ गई, जिसका इंतजार कैप्टन कोहली 24 दिनों से कर रहे थे। 19 जुलाई को कोहली और उनके तीन साथियों को एक पैसेंजर विमान से चुपचाप अमेरिका भेज दिया गया।.
वहां 20 हजार फीट ऊंची मैकिनाले चोटी पर माइनस 30-40 डिग्री तापमान और खतरनाक बर्फीले तूफानों के बीच काम करने की ट्रेनिंग दी गई। फिर प्लूटोनियम से चलने वाले जासूसी डिवाइस को पीठ पर लादकर पहाड़ चढ़ने की प्रैक्टिस कराई जाने लगी।.
इधर, भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग छिड़ चुकी थी। अमेरिका इस जंग में तटस्थ था, लेकिन पाकिस्तान खुलकर अमेरिकी पैटन टैंकों और हथियारों का इस्तेमाल कर रहा था।.
28 अगस्त को भारतीय टीम लौट आई। एक सैनिक विमान से अमेरिकी खुफिया अफसर और जासूसी उपकरण भी भारत पहुंचा दिया गया।.
अमेरिकी टीम उपकरण को दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी 'कंचनजंगा' पर लगाना चाहती थी। कैप्टन कोहली इसके लिए राजी नहीं हुए। लंबी बहस के बाद 'नंदा देवी की टॉप चोटी' को चुना गया। ऊंचाई 25 हजार 645 फीट। यह भारत की सीमा के भीतर थी और चीन की सरहद पर सीधी नजर रखती थी।.
18 लोगों की टीम बनी- कैप्टन कोहली समेत 4 भारतीय और 14 अमेरिकी। कोहली को ऑपरेशन का फील्ड कमांडर बनाया गया।.
1 सितंबर 1965 की सुबह दिल्ली से काफिला निकला और 3 सितंबर को जोशीमठ पहुंच गया। आगे सड़कें नहीं थीं। करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर नंदा देवी बेस कैंप था। वहीं से पूरा ऑपरेशन चलने वाला था।.
वहां जाने का रास्ता संकरा, पथरीला और जानलेवा था। पैदल ही चलकर जाना था, वो भी 57 किलो भारी जासूसी उपकरण को लेकर।.
200 कुलियों और 14 शेरपाओं को जुटाया गया। मशीन को 6 टुकड़ों में बांटा गया, ताकि किसी एक बंदे पर ज्यादा बोझ न पड़े। टीम चल पड़ी। आगे-आगे शेरपा, कुली और पर्वतारोही चल रहे थे, और ठीक पीछे CIA के अफसर और कैप्टन कोहली।.
18 सितंबर को टीम नंदा देवी बेस कैंप पहुंच गई। बर्फानी हवाएं इतनी ठंडी थीं कि हर सांस फेफड़ों में सुइयों की तरह चुभती थी। यहां करीब 15 दिन गुजारने थे। भारतीय अफसरों के दिमाग में फिर से मिशन की सीक्रेसी का सवाल कौंधने लगा।.
In short, स्पाई फाइल्सचीन की जासूसी खातिर परमाणु उपकरण लगा रहे थे भारत-अमेरिका: बर्फीले is the central thread here, and readers can expect follow-up reporting as the picture becomes clearer.


