हिमालय की 221 झीलें ला सकती हैं नेपाल जैसी तबाही: 491 साल में 254 बार फट चुकीं; उत्तराखंड में हैंगिंग ग्लेशियर सबसे बड़ा खतरा1:07Play video

हिमालय की 221 झीलें ला सकती हैं नेपाल जैसी तबाही: 491 साल में 254 बार फट चुकीं; उत्तराखंड में हैंगिंग ग्लेशियर सबसे बड़ा खतरा. आदर्श शर्मा देहरादून7 घंटे पहले. कॉपी लिंक.

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हिमालय की 221 झीलें ला सकती हैं नेपाल जैसी तबाही: 491 साल में 254 बार फट चुकीं; उत्तराखंड में हैंगिंग ग्लेशियर सबसे बड़ा खतरा1:07Play video

हिमालय की 221 झीलें ला सकती हैं नेपाल जैसी तबाही: 491 साल में 254 बार फट चुकीं; उत्तराखंड में हैंगिंग ग्लेशियर सबसे बड़ा खतरा. आदर्श शर्मा देहरादून7 घंटे पहले. कॉपी लिंक.

Article outline

  1. What happened
  2. The details
  3. A closer look
  4. The key numbers
  5. More on the story
  6. The bottom line

Key points

  • 1990 के बाद बनीं 1052 नई ग्लेशियल झीलें.
  • कोसी घाटी में 1125 झीलें, 47 संवेदनशील.
  • 491 साल में 254 बार फटीं ग्लेशियल झीलें.
  • बद्रीनाथ-माणा से सिर्फ 1.4 किमी ऊपर 3 ग्लेशियर.
  • विष्णुगंगा में सबसे ज्यादा 69 हैंगिंग ग्लेशियर.

नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने एक बार फिर हिमालय में ग्लेशियरों से जुड़े खतरे की ओर ध्यान खींचा है। इसी बीच देहरादून स्थित वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान समेत 3 संस्थानों की नई रिसर्च सामने आई है।.

इसमें हिमालय रीजन में 221 ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है, जिनके फटने पर अचानक बाढ़ यानी ग्लेशियल लेक आउट बर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा बन सकता है। रिसर्च में कोसी, यारलुंग जांगबो, मानस और ऊपरी सिंधु नदी घाटियों को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में रखा गया है।.

भारत में भी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम की कई नदी घाटियां संवेदनशील जोन हैं। बाढ़ आई तो इनकी चपेट में 6 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 39 जिलों पर असर पड़ सकता है।.

अलकनंदा बेसिन में हुए एक दूसरे अध्ययन में 219 हैंगिंग ग्लेशियर मिले हैं। इनके टूटने पर बर्फ के साथ चट्टान और मलबा तेजी से नीचे आ सकता है, जिससे बद्रीनाथ-माणा समेत चमोली के निचले इलाकों को खतरा हो सकता है।.

कोसी नदी घाटी के अरुण क्षेत्र में 1, 125 झीलें गई हैं। यारलुंग जांगबो में 773, मानस की दांगमे चू घाटी में 715 और ऊपरी सिंधु घाटी में 619 झीलें हैं।.

पूरे हिमालय में 221 महत्वपूर्ण झीलों में कोसी घाटी की 47 झीलें शामिल हैं, जो सबसे ज्यादा हैं। स्टडी के मुताबिक, भारत की चिनाब, झेलम, तीस्ता और व्यास नदी घाटियां संवेदनशील हैं।.

अलकनंदा बेसिन में कुल 848 ग्लेशियर हैं, जिनमें 219 को हैंगिंग ग्लेशियर माना गया है। इनका क्षेत्रफल करीब 71.7 वर्ग किमी है। इनमें करीब 2.39 घन किमी बर्फ है, जिसमें करीब 0.74 घन किमी अस्थिर बर्फ मानी गई है।.

अलकनंदा की सहायक नदियों में विष्णुगंगा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 69 हैंगिंग ग्लेशियर मिले हैं। इनका क्षेत्रफल 28.21 वर्ग किमी है।.

महत्वपूर्ण बात यह है कि अस्थिर बर्फ का करीब 68% हिस्सा 0.1 से 0.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले ग्लेशियरों में है यानी छोटे ग्लेशियर भी महत्वपूर्ण हो खतरनाक हो सकते हैं।.

बद्रीनाथ-माणा क्षेत्र के ऊपर तीन ग्लेशियर हैं। सबसे नजदीकी ग्लेशियर बस्तियों से करीब 1.4 किमी ऊपर है। तीनों में कुल अस्थिर बर्फ करीब 0.012 घन किमी है। इन ग्लेशियरों में कई दरारें भी देखी गई हैं।.

उत्तराखंड को बर्फीली चोटियों, घने जंगलों और नदियों के राज्य के रूप में देखा जाता है, लेकिन पिछले 30 साल में इसकी जमीन की तस्वीर तेजी से बदली है। 1992 से 2022 के बीच बर्फ का क्षेत्र घटा, प्राकृतिक वनस्पति कम हुई और निर्मित क्षेत्र करीब 13 गुना बढ़ गया। इसी दौरान बारिश और तापमान के पैटर्न में भी बदलाव दिखाई दिया। (पढ़ें पूरी खबर).

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For now, हिमालय की 221 झीलें ला सकती हैं नेपाल जैसी तबाही: 491 साल remains the part of the story worth watching, and further updates are likely as more details are confirmed.

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